
मानसून का मौसम भीषण गर्मी से राहत तो लाता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियों और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा भी लेकर आता है। बारिश में भीगने से बचने के लिए रेनकोट हमारा सबसे बड़ा साथी होता है। अक्सर देखा जाता है कि लोग दोस्तों, परिवार के सदस्यों या सहकर्मियों के साथ रेनकोट शेयर कर लेते हैं। आपात स्थिति में किसी और का रेनकोट पहन लेना बेहद सामान्य बात लगती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी आदत आपकी त्वचा (Skin) के लिए एक गंभीर मुसीबत बन सकती है?
इस्तेमाल किया हुआ या गीला रेनकोट शेयर करने से फंगल और बैक्टीरियल स्किन इन्फेक्शन फैलने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। रेनकोट का मटीरियल वॉटरप्रूफ होता है, जिसके अंदर नमी और पसीना बंद (trap) हो जाते हैं। अगर रेनकोट अंदर से गीला है और उसे बिना धोए या सुखाए कोई दूसरा व्यक्ति पहन लेता है, तो उसमें मौजूद फंगस (जैसे दाद/Ringworm) या बैक्टीरिया तुरंत दूसरे व्यक्ति की त्वचा पर ट्रांसफर हो जाते हैं।
रेनकोट का निर्माण आमतौर पर पीवीसी (PVC), नायलॉन या प्लास्टिक कोटेड फैब्रिक से होता है। यह मटीरियल बाहर के पानी को तो अंदर नहीं आने देता, लेकिन साथ ही यह शरीर के पसीने और गर्मी (Body Heat) को भी बाहर नहीं निकलने देता।
दूसरों का रेनकोट इस्तेमाल करने से मुख्य रूप से निम्नलिखित फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण हो सकते हैं:
मानसून के दौरान अपनी त्वचा को फंगस, रैशेज और इंफेक्शन से पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए इन नियमों का पालन करें:
मानसून के सुहावने मौसम का आनंद लें, लेकिन अपनी सेहत और स्वच्छता की कीमत पर नहीं। आपात स्थिति में रेनकोट शेयर करना भले ही एक आसान विकल्प लगे, लेकिन यह आपकी त्वचा के लिए हफ्तों की परेशानी का कारण बन सकता है। हमेशा अपना रेनकोट साथ रखें, उसे साफ और सूखा रखें और पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखें। अगर त्वचा पर किसी भी तरह का इन्फेक्शन दिखाई दे, तो तुरंत किसी त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) से सलाह लें।