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एक ही हफ्ते में शाहबाज, एर्दोआन और मोदी… आखिर पश्चिम एशिया में क्या बदल रहा है? जानिए सऊदी अरब की नई कूटनीति

Saudi arab new deplomacy: पाकिस्तान के PM शाहबाज शरीफ और तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोआन रियाद के दौरे पर हैं, इसमें एक रक्षा समझौते की भी चर्चा है, इसी बीच भारत-इजराइल वार्ता एक बड़ा इशारा है कि रियाद अपने आर्थिक और रणनीतिक हित समानांतर तरीके से साध रहा है।
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Aug 07, 2026
Saudi Arabia New Diplomacy
Saudi Arabia New Diplomacy: आखिर क्या है सऊदी अरब की नई कूटनीति? (AI Creative)

Saudi arab new diplomacy: पश्चिम एशिया की राजनीति इन दिनों तेजी से बदल रही है। एक ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का सऊदी अरब दौरा चर्चा में रहा, वहीं अब तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन भी सऊदी अरब पहुंच चुके हैं। इसी दौरान तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जिसे कुछ जानकार 'इस्लामिक नेटो' तक कह रहे हैं। इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत भी हुई है। पहली नजर में ये घटनाएं अलग-अलग लग सकती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी के केंद्र में सऊदी अरब की बदलती कूटनीतिक रणनीति है।

अब सवाल यह है कि आखिर सऊदी अरब एक साथ तुर्किये, पाकिस्तान, भारत और इजराइल जैसे अलग-अलग देशों के साथ रिश्ते क्यों मजबूत कर रहा है?

सऊदी अरब क्यों बदल रहा है अपनी रणनीति?

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की विजन 2030 योजना का लक्ष्य केवल तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर निवेश, पर्यटन, तकनीक और वैश्विक व्यापार का केंद्र बनना है। इसके लिए सऊदी अरब को पश्चिम और पूर्व, दोनों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने की जरूरत है। यही वजह है कि वह किसी एक शक्ति या गुट पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ समानांतर रिश्ते विकसित कर रहा है।

एर्दोआन की यात्रा क्यों मानी जा रही अहम?

तुर्किये और सऊदी अरब के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव रहा। हालांकि हाल के वर्षों में दोनों देशों ने संबंध सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। एर्दोआन की यात्रा को रक्षा सहयोग, निवेश, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जानिए क्या है तुर्किये-सऊदी-पाकिस्तान डिफेंस पैक्ट?

सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसमें नाटो (NATO) के आर्टिकल 5 जैसी शर्त शामिल है, यानी एक देश पर हमले को दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। अब खबर है कि तुर्किये भी इस पैक्ट में शामिल होने जा रहा है, और जेद्दा में इसका औपचारिक समझौता होने की संभावना जताई जा रही है।

यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की अस्थिर स्थिति और यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में जारी हमलों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। भारत के लिए यह चिंता का सबब इसलिए है, क्योंकि इससे पाकिस्तान को एक मजबूत सैन्य गठबंधन का समर्थन मिल सकता है, जिसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर पड़ सकता है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब?

भारत और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा, निवेश, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। इसके अलावा भारत, अमेरिका, यूरोप और पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) को भी भविष्य की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है।

ऐसे समय में जब सऊदी अरब तुर्किये और पाकिस्तान से भी संपर्क बनाए हुए है, भारत के लिए यह जरूरी है कि उसके रणनीतिक और आर्थिक हित मजबूत बने रहें। साथ ही, तुर्किये-सऊदी-पाकिस्तान डिफेंस पैक्ट को लेकर भी नई दिल्ली की नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर असर पड़ सकता है।

क्यों चर्चा में है इजराइल से बातचीत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की फोन पर हुई बातचीत ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव अब भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। भारत लंबे समय से इजराइल और अरब देशों दोनों के साथ संतुलित संबंध रखने की नीति अपनाता रहा है।

क्या पाकिस्तान को मिलेगा फायदा?

शाहबाज शरीफ का सऊदी दौरा आर्थिक सहयोग और निवेश की उम्मीदों से जुड़ा माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब अब किसी एक देश को प्राथमिकता देने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार सभी प्रमुख साझेदारों के साथ संबंध बनाए रखने की नीति पर काम कर रहा है।

समझिए पूरी तस्वीर

दरअसल सऊदी अरब अब बहु-आयामी (Multi-Alignment) विदेश नीति अपना रहा है। उसका सीधा लक्ष्य है निवेश, व्यापार और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाना। भारत, तुर्किये, पाकिस्तान और इजराइल सभी के साथ उसके अलग-अलग हित जुड़े हुए हैं। पश्चिम एशिया की नई राजनीति में वैश्विक आर्थिक हित, सुरक्षा और कूटनीति साथ-साथ चल रहे हैं।

फैक्ट फाइल- ये जानना भी जरूरी

सऊदी अरब किन देशों के साथ समानांतर रिश्ते मजबूत कर रहा है?

  • भारत- ऊर्जा, निवेश, IMEC, रक्षा
  • तुर्किये- व्यापार, रक्षा, क्षेत्रीय सहयोग
  • पाकिस्तान- आर्थिक सहयोग और पारंपरिक रिश्ते
  • इजराइल- क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अप्रत्यक्ष समीकरण
  • अमेरिका- रक्षा और रणनीतिक साझेदारी
  • चीन- निवेश और ऊर्जा सहयोग

एक नजर में पूरा घटनाक्रम

4 बड़े घटनाक्रम, एक ही समय में

  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का सऊदी अरब दौरा।
  • तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन का रियाद पहुंचना।
  • तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान का संभावित रक्षा समझौता (डिफेंस पैक्ट)।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत।

आखिर सऊदी अरब क्यों है सबसे अहम?

  • दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देशों में शामिल।
  • इस्लाम के दो पवित्र शहर मक्का और मदीना यहीं हैं।-विजन 2030 के तहत वैश्विक निवेश केंद्र बनने की कोशिश।
  • पश्चिम एशिया की राजनीति में सबसे प्रभावशाली देशों में गिना जाता है।

क्या है Vision 2030?

  • 2016 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने Vision 2030 की शुरुआत की थी। इसका मुख्य लक्ष्य तेल पर निर्भरता कम करना। पर्यटन बढ़ाना। विदेशी निवेश आकर्षित करना। इसके साथ ही नई तकनीक और उद्योग विकसित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना।

भारत के लिए क्यों अहम है सऊदी अरब?

  • भारत का प्रमुख ऊर्जा साझेदार।
  • वहां लाखों भारतीय काम करते हैं।
  • दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार।
  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
  • IMEC (India-Middle East-Europe Corridor) में महत्वपूर्ण भूमिका।

क्या बदल रही है पश्चिम एशिया की राजनीति?

  • विशेषज्ञों के मुताबिक अब क्षेत्र की राजनीति सिर्फ धर्म या सैन्य गठबंधन तक सीमित नहीं है। अब सबसे ज्यादा महत्व निवेश, व्यापार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी कॉरिडोर और रणनीतिक संतुलन को मिल रहा है।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

  • क्या सऊदी अरब सभी देशों के साथ संतुलन बनाए रख पाएगा?
  • IMEC परियोजना पर क्या प्रगति होती है?
  • गाजा और क्षेत्रीय तनाव का कूटनीतिक रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?
  • भारत-सऊदी और तुर्किये-सऊदी संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे?
  • तुर्किये-सऊदी-पाकिस्तान डिफेंस पैक्ट औपचारिक रूप से कब और कैसे लागू होता है?

अब पश्चिम एशिया की राजनीति 'या तो हमारे साथ, या विरोध में' वाली नहीं रही। सऊदी अरब की कोशिश है कि वह भारत, तुर्किये, पाकिस्तान, अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों के साथ अपने-अपने हितों के आधार पर समानांतर रिश्ते बनाए रखे। यही नई कूटनीति इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश मानी जा रही है।

Updated on:
07 Aug 2026 10:03 am
Published on:
07 Aug 2026 10:03 am