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Sawan Somwar 2026: सावन सोमवार की संपूर्ण गाइड: महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, रुद्राभिषेक कैसे करें, क्या चढ़ाएं और क्या न करें

Sawan Somwar 2026: यहां पढ़िए सावन सोमवार 2026 की संपूर्ण धार्मिक गाइड। इस गइड में सावन की तिथियों, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, घर पर रुद्राभिषेक की प्रक्रिया, शिवलिंग पर चढ़ाने और न चढ़ाने योग्य सामग्री और व्रत के नियमों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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Jul 25, 2026
Sawan Somwar 2026 Dates Sawan 2026
सावन सोमवार की पूरी गाइड। (Image: AI)

Sawan Somwar 2026: हिंदू धर्म में श्रावण (सावन) मास को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों और द्रिक पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन से गृह क्लेश, मानसिक तनाव व बीमारियां दूर होती हैं। इस आर्टिकल में जानिए, सावन सोमवार की पूजा, मुहूर्त, रुद्राभिषेक की सही विधि और सभी जरूरी नियम।

सावन सोमवार क्यों खास माना जाता है?

सावन का महीना प्रकृति और भक्ति के अद्भुत संगम का समय होता है। शास्त्रों के अनुसार, सोमवार का कारक ग्रह चंद्रमा है, जो मन का स्वामी है। भगवान शिव चंद्रमौली हैं, जिन्होंने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है। इसलिए सावन के सोमवार को महादेव की आराधना करने से शिवजी की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही कुंडली में चंद्रमा भी मजबूत होता है।

पौराणिक मान्यता क्या कहती है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन महीने में ही कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था। इसके अलावा, समुद्र मंथन के दौरान निकला 'हलाहल' विष भी महादेव ने सावन के महीने में ही धारण किया था, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। विष की तीव्र गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल और दूध अर्पित किया था। यही कारण है कि महादेव को दूध और जल अर्पित किया जाता है।

सावन सोमवार 2026 की तिथियां

द्रिक पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार, उत्तर भारत (पूर्णिमांत कैलेंडर) में वर्ष 2026 का सावन महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। इस वर्ष सावन में कुल 4 मुख्य सोमवार पड़ रहे हैं:

सावन सोमवारतिथि (Date)दिनविशेष धार्मिक संयोग
पहला सोमवार3 अगस्त 2026सोमवारसावन व्रत का शुभारंभ
दूसरा सोमवार10 अगस्त 2026सोमवारशिव-लक्ष्मी योग, सुख-समृद्धिदायक
तीसरा सोमवार17 अगस्त 2026सोमवारनाग पंचमी का दुर्लभ संयोग
चौथा सोमवार24 अगस्त 2026सोमवारसावन सोमवार का समापन

कौन-सा सोमवार सबसे विशेष माना जा रहा है?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल का तीसरा सावन सोमवार (17 अगस्त 2026) सबसे दुर्लभ और फलदायी माना जा रहा है। इस दिन नाग पंचमी का शुभ पर्व भी पड़ रहा है। सोमवार और नाग पंचमी का यह पावन संयोग कालसर्प दोष से मुक्ति पाने और महादेव व नाग देवताओं का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, मुख्य पूजा मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:20 AM से 05:05 AM तक (ध्यान, संकल्प और मंदिर सफाई के लिए सर्वोत्तम)
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 PM से 12:53 PM तक (दोपहर की मुख्य पूजा के लिए शुभ)
  • प्रदोष काल: शाम 06:45 PM से 08:15 PM तक (शिवलिंग पूजन और जलाभिषेक का सर्वोत्तम समय)

सावन सोमवार की पूजा सामग्री

सामग्रीधार्मिक उपयोग व महत्व
जल व गंगाजलमन की शुद्धि और नीलकंठ को शीतलता देने हेतु
बेलपत्र (3 पत्तों वाला)त्रिगुण एवं त्रिनेत्र का प्रतीक (अखंडित)
धतूरा व भांगशिवजी की प्रिय औषधीय सामग्रियां
सफेद चंदनशिवलिंग पर त्रिपुंड लगाने और शीतलता हेतु
अक्षत (बिना टूटे चावल)अखंड सौभाग्य और धन-धान्य की प्राप्ति हेतु
पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर)शिवलिंग के अभिषेक और प्रसाद हेतु
फल एवं फूल (सफेद आक, कनेर)प्रभु को नैवेद्य अर्पित करने के लिए

सावन सोमवार की पूजा विधि

सुबह क्या करें

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. सूर्य देव को जल अर्पित करें और घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर सावन सोमवार व्रत का संकल्प लें।

शिवलिंग का अभिषेक कैसे करें?

  1. सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें।
  2. इसके बाद गंगाजल मिलाकर कच्चा दूध, दही, शहद, घी और अंत में पुनः शुद्ध जल चढ़ाएं।
  3. शिवलिंग को स्वच्छ वस्त्र से पोंछकर सफेद चंदन का त्रिपुंड बनाएं।
  4. अब 3 पत्तों वाला बेलपत्र (चिकना भाग शिवलिंग की तरफ), धतूरा, भांग, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें।

कौन-सा मंत्र बोलें?

अभिषेक और पूजन करते समय निरंतर 'ॐ नमः शिवाय' या 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' का जप करते रहें।

आरतीः पूजा के अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी और माता पार्वती की आरती करें और कपूर जलाकर आरती लें।

रुद्राभिषेक कैसे करें?

रुद्राभिषेक का अर्थ है रुद्र (भगवान शिव) का मंत्रोच्चार के साथ पवित्र द्रव्यों से स्नान कराना। यह शास्त्रों में शिवजी को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली अनुष्ठान माना गया है।

घर पर रुद्राभिषेक करने की विधि:

  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके शिवलिंग को तांबे या पीतल की परात में स्थापित करें।
  • हाथों में जल व अक्षत लेकर नाम और गोत्र बोलकर रुद्राभिषेक का संकल्प लें।
  • सबसे पहले गणेश जी, माता पार्वती और नवग्रहों का ध्यान करें।
  • शिवलिंग पर सबसे पहले जल, फिर पंचामृत, धाराप्रवाह गंगाजल और गन्ने का रस या शहद अर्पित करें।
  • अभिषेक के बाद शिवलिंग को पोंछकर चंदन, बेलपत्र, धतूरा चढ़ाएं और फल-मिठाई का भोग लगाकर आरती करें।

रुद्राभिषेक में किन चीजों का प्रयोग करें?

  • गंगाजल: मोक्ष और पाप मुक्ति हेतु।
  • दूध: आरोग्य और दीर्घायु प्राप्ति के लिए।
  • गन्ने का रस: धन-धान्य और समृद्धि के लिए।
  • मधु (शहद): वाणी दोष दूर करने और मान-सम्मान के लिए।
  • घी: वंश वृद्धि और ज्ञान के लिए।

रुद्राभिषेक के दौरान कौन-सा मंत्र पढ़ें?

रुद्राभिषेक के समय यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ पंडित जी द्वारा कराया जाता है। यदि स्वयं कर रहे हैं, तो 'ॐ नमो भगवते रुद्राय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का पाठ करें।

सावन सोमवार व्रत के नियम

  • क्या खाना चाहिए: फलाहार में सेंधा नमक से बनी साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, मखाना, दूध, दही और ताजे फल खा सकते हैं।
  • क्या नहीं खाना चाहिए: तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा, बैंगन, मसूर दाल और साधारण सफेद नमक का प्रयोग वर्जित है।
  • कौन व्रत रख सकता है: महिला, पुरुष, कुंवारी कन्याएं और बुजुर्ग सभी सावन सोमवार का व्रत रख सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए फलाहारी नियम अपनाना चाहिए।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

  • जल, गंगाजल और कच्चा दूध
  • बेलपत्र, भांग और धतूरा
  • शमी के पत्ते (शनि दोष मुक्ति के लिए)
  • सफेद चंदन और अक्षत (बिना टूटे चावल)
  • भस्म और इत्र

शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए

  • तुलसी के पत्ते: जलंधर दैत्य की पत्नी वृंदा के कारण शिवजी पर तुलसी अर्पित करना वर्जित है।
  • केतकी के फूल: भगवान ब्रह्मा के झूठ में भागीदार बनने के कारण शापित।
  • हल्दी व कुमकुम: हल्दी स्त्री-तत्व का प्रतीक है और शिवलिंग पुरुष-तत्व (वैराग्य) का।
  • सिंदूर: यह सौभाग्य सामग्री है, जबकि शिवजी वैरागी हैं।
  • शंख का जल: शंखचूड़ दैत्य का वध शिवजी ने किया था, इसलिए शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता।

सावन सोमवार पर कौन-से मंत्र बोलें?

  • महामृत्युंजय मंत्र:ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
  • पंचाक्षरी मंत्र:ॐ नमः शिवाय।
  • रुद्र मंत्र:ॐ नमो भगवते रुद्राय॥

सावन सोमवार की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समृद्ध नगर में एक साहूकार रहता था। उसके पास धन-दौलत की कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने से वह दुखी था। वह हर सावन सोमवार को शिवजी का व्रत और पूजन करता था। उसकी भक्ति देखकर माता पार्वती की प्रार्थना पर शिवजी ने उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया, किंतु पुत्र की आयु केवल 12 वर्ष तय की।

जब लड़का 12 वर्ष का हुआ तो उसे मामा के साथ काशी विद्याध्ययन के लिए भेजा गया। रास्ते में एक कन्या के विवाह संकट को उसने दूर किया। काशी में 12वें वर्ष में जब उसकी मृत्यु का समय आया, तो उसके द्वारा किए गए सावन सोमवार व्रत के प्रभाव से यमराज को भी पीछे हटना पड़ा और भगवान शिव ने उसे दीर्घायु प्रदान की। तब से सावन सोमवार व्रत का महत्व जन-जन में प्रसिद्ध हुआ।

सावन सोमवार की पूजा के लाभ

  • मनोवांछित जीवनसाथी: कुंवारी कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है।
  • वैवाहिक सुख: दांपत्य जीवन में मधुरता और पारिवारिक शांति आती है।
  • ग्रह दोष शांत: कुंडली में चंद्रमा, राहु-केतु और कालसर्प दोष दूर होते हैं।
  • आरोग्य व मानसिक शांति: गंभीर बीमारियों से मुक्ति और मानसिक क्लेश समाप्त होते हैं।

इन गलतियों से बचें

  1. टूटा बेलपत्र चढ़ाना: बेलपत्र हमेशा 3 पत्तियों वाला और कहीं से कटा-फटा नहीं होना चाहिए।
  2. हल्दी व केतकी चढ़ाना: शिवलिंग पर गलती से भी हल्दी, कुमकुम या केतकी का फूल न चढ़ाएं।
  3. गलत दिशा में बैठकर पूजा: जलाभिषेक करते समय हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके पूजा न करें।
  4. बिना स्नान पूजा करना: बिना स्वच्छता और बिना स्नान किए शिवलिंग को स्पर्श या पूजा न करें।
  5. चरणामृत/अभिषेक जल को लांघना: शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कभी न करें, सोमसूत्र (जल निकासी मार्ग) को लांघना वर्जित होता है।
Updated on:
25 Jul 2026 05:09 pm
Published on:
25 Jul 2026 05:09 pm