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The Backrooms: इंटरनेट का सबसे डरावना सीक्रेट, जब घर बैठे खाली कमरों में भटकने लगे लाखों लोग!

Digital Tourism: इंटरनेट पर पीले वॉलपेपर वाले खाली कमरों की तस्वीरों से शुरू हुआ 'द बैक रूम्स' अब एक विशाल डिजिटल भूलभुलैया बन चुका है। लोग इसे केवल देख नहीं रहे, बल्कि गेमिंग और वीडियो के जरिये खुद इस डरावनी दुनिया का तलाश कर रहे हैं।
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Jul 26, 2026
The Backrooms Tourism News,
अंतहीन पीले कमरों और सुनसान गलियारों का यह डरावना सीन ‘द बैक रूम्स’ के डिजिटल ख़ौफ़ की पहचान बन गया है। (विजुअल: ChatGPT.)

The backrooms Viral Creepypasta: क्या आपने कभी सोचा है कि किसी ऐसी जगह की सैर की जाए, जो इस पूरी दुनिया के नक्शे पर मौजूद ही न हो? एक ऐसी जगह जिसके बारे में कोई सरकारी किताब नहीं बताती, लेकिन इंटरनेट की गलियों में उसके बारे में सिर्फ खौफनाक फुसफुसाहटें सुनाई देती हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं 'बैक रूम्स' (The Backrooms) की! शुरू में यह सिर्फ एक साधारण और अजीब सी तस्वीर थी, लेकिन आज यह इंटरनेट की दुनिया का सबसे बड़ा डरावना आकर्षण बन चुका है। लोग अब सिर्फ भूतिया कहानियों को सुनते या पढ़ते नहीं हैं, बल्कि इस काल्पनिक दुनिया में खुद कदम रख रहे हैं। शोधकर्ता इसे 'डिजिटल टूरिज्म' (डिजिटल पर्यटन) का नाम दे रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर यह 'बैक रूम्स' का पूरा माजरा क्या है और क्यों दुनिया भर के लोग इस अजीबोगरीब डर के दीवाने हो रहे हैं। यह विषय सब अब रिसर्च का विषय बन गया है।

जहां हर दरवाज़ा एक नए कमरे में खुलता है, वहीं से शुरू होता है ‘द बैक रूम्स’ का अंतहीन डिजिटल ख़ौफ़। ( विजुअल: ChatGPT.)

आखिर क्या है यह 'बैक रूम्स'?

सरल शब्दों में कहें तो 'बैक रूम्स' इंटरनेट द्वारा बनाई गई एक काल्पनिक और बेहद डरावनी दुनिया है।

इस दुनिया की कल्पना कैसे की गई है?

बेशुमार कमरों का जाल: मान लीजिए कि आप एक ऐसे रास्ते में फंस गए हैं जहां सिर्फ पीले रंग के वॉलपेपर वाले कमरे, गीली पुरानी कालीनें और छत पर चहचहाती हुई फ्लोरोसेंट (ट्यूबलाइट) लाइटें लगी हुई हैं।

खत्म न होती भूलभुलैया: ये कमरे कभी खत्म ही नहीं होते। आप एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते रहेंगे, लेकिन आपको बाहर निकलने का कोई दरवाजा या खिड़की नहीं मिलेगी।

कोई नहीं है फिर भी डर है: इन कमरों में कोई भूत या शैतान सामने नहीं दिखता, लेकिन माहौल इतना सुनसान और अजीब और डरावना होता है कि आपको हर पल लगेगा कि आपके पीछे कोई खड़ा हुआ है। इंटरनेट की भाषा में माना जाता है कि इंसान जब अपनी आम दुनिया की वास्तविकता से गलती से "निकल" (Glitch) जाता है, तो वह इस नीरस और अंतहीन भूलभुलैया में फंस जाता है।

एक साधारण तस्वीर से कैसे बनी इतनी बड़ी खौफनाक दुनिया?

इस पूरी कहानी की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। इंटरनेट के एक गुमनाम फोरम '4chan' पर किसी ने एक अजीब से कमरे की फोटो पोस्ट की। फोटो में सिर्फ एक खाली, पीले वॉलपेपर वाला कमरा दिख रहा था जिसमें कोई खिड़की नहीं थी। इस तस्वीर ने लोगों के दिमाग में एक अजीब सी बेचैनी और पुरानी यादों (Nostalgia) का मिक्स अहसास जगाया। लोगों ने इस फोटो के नीचे अपने मनगढ़ंत किस्से लिखने शुरू कर दिए।

सोशल मीडिया पर काल्पनिक दुनिया की धूम मची

देखते ही देखते यह फोटो और इससे जुड़ी बातें रेडिट (Reddit), टिकटॉक (TikTok), यूट्यूब (YouTube) और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गईं। आज के समय में टिकटॉक पर #backrooms नाम के हैशटैग पर 5 लाख से भी ज्यादा पोस्ट मौजूद हैं। इंस्टाग्राम और रेडिट पर इसके लाखों दीवाने हैं, जो रोज़ इस काल्पनिक दुनिया के नए-नए नक्शे, जीवन रक्षा गाइड (Survival Guides) और फर्जी डायरी के पन्ने बना कर शेयर करते हैं।

यूट्यूब और फिल्मों का तड़का: जब खौफ बना सिनेमा

बैक रूम्स को इंटरनेट के छोटे से कोने से निकाल कर पूरी दुनिया में मशहूर करने का श्रेय केन पार्सन्स (Kane Parsons) नाम के एक युवा फिल्म निर्माता को जाता है। फाउंड फुटेज" वीडियो: केन पार्सन्स ने यूट्यूब पर एक वीडियो सीरीज बनाई, जो ऐसी दिखती थी मानो किसी का पुराना कैमरा गिर गया हो और उसमें बैक रूम्स की डरावनी रिकॉर्डिंग कैद हो गई हो। इस वीडियो ने लोगों को घर बैठे ऐसा अहसास कराया कि मानो वे खुद उस पीले, बदबूदार और अंतहीन कमरे में पैदल चल रहे हों।

अब इस विषय पर बन रही है फिल्म

केन पार्सन्स का यह विचार इतना वायरल हुआ कि अब इस पर एक पूरी हॉरर-थ्रिलर फिल्म (Feature Film) बनाई जा रही है। यापि जो चीज़ सिर्फ इंटरनेट की गप्पबाज़ी थी, वह अब बड़े पर्दे पर सिनेमाघरों में दिखने वाली है।

यह पारंपरिक डरावनी कहानियों से कैसे अलग है

हम सबने बचपन में चुड़ैलों, भूतों या 'स्लैंडरमैन' (Slenderman) जैसी डरावनी शहरी कहानियां (Creepypasta) सुनी हैं। लेकिन 'बैक रूम्स' उनसे बिल्कुल अलग है। लोककथाओं के विद्वान इसे ऑनलाइन किंवदंती-यात्रा (Online Legend-Tripping) कहते हैं। यहां लोग केवल कहानी सुनने वाले नहीं, बल्कि कहानी बनाने वाले (Co-creators) बन चुके हैं।

'द बैकरूम' एक नया एआई डिजिटल अनुभव! ट्रेडिशनल हॉरर इंटरफ़ेस में सबसे अलग ​है। ( विजुअल: ChatGPT.)

आखिर डार्क टूरिज्म क्या होता है?

रिसर्चर्स (जैसे सोफी जेम्स और जेम्स क्रोनिन) ने अपने रिसर्च पेपर में इसे 'डार्क टूरिज्म' से जोड़ा है। जब लोग किसी दुखद, डरावनी या ऐतिहासिक त्रासदी वाली जगह पर घूमने जाते हैं (जैसे पुरानी जेलें, भुतहा किले या युद्ध के मैदान), तो उसे 'डार्क टूरिज्म' कहा जाता है।

बैक रूम्स अलग क्यों है?

कोई भौतिक वजूद नहीं: बैक रूम्स की कोई असली जमीन या इमारत नहीं है। यह पूरी तरह से डिजिटल और काल्पनिक है।

कोई इतिहास नहीं: यहां कोई पुरानी लड़ाई या दुर्घटना नहीं हुई है।

मानसिक जुड़ाव: इसके बावजूद, लोग इस काल्पनिक जगह से भावनात्मक रूप से जुड़ रहे हैं। वे वीडियो गेम, वीआर (Virtual Reality) चश्मों और यूट्यूब वीडियो के जरिये इन कमरों में 'घूमने' का अनुभव लेते हैं।

सुनसान पीले गलियारों और खाली कमरों का यह अजीब माहौल ‘द बैक रूम्स’ को इंटरनेट का सबसे रहस्यमय डिजिटल डर बनाता है।( विजुअल: ChatGPT.)

डिजिटल दुनिया का नया भविष्य

रिसर्चर्स का मानना है कि 'बैक रूम्स' सिर्फ एक इंटरनेट ट्रेंड या टाइमपास नहीं है। यह इस बात का सुबूत है कि हमारी इंटरनेट संस्कृति किस दिशा में बदल रही है:

सूचना से अनुभव तक: इंटरनेट अब केवल खबरें पढ़ने या मैसेज भेजने की जगह नहीं रहा। यह एक ऐसा परिदृश्य (Landscape) बनता जा रहा है जहां लोग भावनात्मक रूप से समय बिताते हैं।

बिना यात्रा के पर्यटन: लोग अब ऐसी काल्पनिक दुनियाओं का पता लगा रहे हैं ,जो असल में कहीं हैं ही नहीं। वे वहां बार-बार लौटते हैं, नक्शे बनाते हैं और अपने अनुभव शेयर करते हैं।

फिल्मों, गेम्स और लाखों लोगों की कॉमन इमेजिनेशन का हिस्सा

बहरहाल,'बैक रूम्स' इस बात की मिसाल है कि कैसे आज का इंसान अकेलेपन, रहस्य और डर को भी मनोरंजन और कला का रूप दे सकता है। एक खाली पीले कमरे की फोटो से शुरू हुआ यह सफर आज फिल्मों, गेम्स और लाखों लोगों की कॉमन इमेजिनेशन का हिस्सा बन चुका है। यह हमें सिखाता है कि कभी-कभी सबसे डरावनी जगहें हमारे बाहरी वातावरण में नहीं, बल्कि हमारी अपनी कल्पनाओं और डिजिटल दुनिया के असीम क्षितिज में छिपी होती हैं!

Updated on:
26 Jul 2026 04:28 pm
Published on:
26 Jul 2026 04:28 pm