बाघ की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्रीय स्कूलों को एहतियातन बंद करने का अनुरोध किया। इसके तहत औरिया, खरोसा, फुलहर, मंडरिया, सहजनिया समेत अन्य गांवों के सरकारी विद्यालय बंद रखे गए, हालांकि शिक्षक विद्यालयों में उपस्थित रहे।
Pilibheet News: पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र में बृहस्पतिवार को महिलाजी की जान लेने वाला बाघ अब तक वन विभाग की पकड़ से बाहर है। इलाके में 20 से अधिक टीमें बाघ की तलाश में जुटी हैं, लेकिन उसकी सटीक लोकेशन का अब तक पता नहीं चल सका है। इस कारण क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। लगातार हमलों के चलते शनिवार को भी क्षेत्र के कई विद्यालय बंद रखे गए।
बृहस्पतिवार को मंडरिया गांव की कृष्णा देवी (50) पर उस वक्त बाघ ने हमला कर दिया जब वह खेत में घास काट रही थीं। बाघ उन्हें गन्ने के खेत में घसीट ले गया और मार डाला। इसके अलावा उसी दिन मंडरिया के किशोर निलेश (17) और सहजनिया गांव की मीना देवी पर भी बाघ ने हमला कर घायल कर दिया। सभी हमले दो घंटे के भीतर हुए, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। मृतका का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, जबकि मीना देवी की हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ रेफर किया गया है।
बाघ की सक्रियता पिछले 40 दिनों से बनी हुई है और वह मेवातपुर, सहजनिया, टाहा, फुलहर और महेशपुर समेत कई गांवों में देखे जाने के बाद ग्रामीणों के लिए आतंक बन चुका है। बीते चार दिनों में ही बाघ ने करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र में ताबड़तोड़ हमले किए हैं, जिनमें दो लोगों की जान जा चुकी है जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
बाघ की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्रीय स्कूलों को एहतियातन बंद करने का अनुरोध किया। इसके तहत औरिया, खरोसा, फुलहर, मंडरिया, सहजनिया समेत अन्य गांवों के सरकारी विद्यालय बंद रखे गए, हालांकि शिक्षक विद्यालयों में उपस्थित रहे।
बाघ को पकड़ने के लिए सामाजिक वानिकी और पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की संयुक्त 20 से अधिक टीमों को क्षेत्र में लगाया गया है। दोनों विभागों के एसडीओ, पांच रेंजर, वन दरोगा, रक्षक और वाचरों की टीम बाघ की तलाश में जुटी हुई है। बावजूद इसके बाघ की सटीक लोकेशन नहीं मिल पाई है।
वन विभाग का दावा है कि बाघ को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। वहीं, घायल मीना देवी की हालत गंभीर बनी हुई है। जिला अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया गया है। सीएमएस डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि बाघ ने मीना की कमर और गर्दन पर गंभीर चोटें पहुंचाई हैं, लेकिन उम्मीद है कि वह जल्द स्वस्थ होंगी।
ग्रामीणों में बाघ के डर के चलते रोजमर्रा के कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। वन विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोग सतर्क रहें और किसी भी अनहोनी से बच सकें।