
पणजी। दिल्ली के आर्कबिशप के पत्र के बाद अब गोवा और दमन के आर्कबिशप के बयान ने सियासी तूफान ला दिया है। गोवा के आर्कबिशप फिलिप नेरी फरारो ने कैथोलिक ईसाइयों से सक्रिय राजनीति में आने की अपील की है। इसके साथ ही फरारो ने मौजूदा सरकार पर हमला करते हुए संविधान को खतरे में बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के शासन नमें एक संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
चापलूसी की राजनीति से करें तोबा
आर्कबिशप के इस बयान के बाद मचे सियासी घमासान के बाद उनके सेक्रटरी को इस मामले में स्पष्टीकरण देना पड़ा। सेक्रटरी ने कहा कि उनकी ओर से हर साल इस तरह का पत्र जारी किया जाता है। उन्होंने कहा इस बार उनके बयानों का गलत मतलब निकाल कर उसका मुद्दा बनाया जा रहा है। सेक्रटरी ने कहा कि यह पत्र हमने अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है।
ऐसे में गलत मतलब निकालने से पहले वेबसाइट पर जाकर उनका यह पत्र पढ़ना चाहिए। फरारो की ओर से रविवार को आए संदेश में कहा गया कि अब यह आवश्यक हो गया है कि आस्थावान लोग भी सक्रिय राजनीति में अपना योगदान दें और चापलूसी की सियासत के स्थान पर अंतरात्मा की आवाज को सुनें। बता दें कि पिछले दिनों दिल्ली के आर्कबिशप अनिल कूटो के पत्र से राजनीति तेज हो गई थी।
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आर्कबिशप अनिल कूटो ने पत्र में लिखा था कि सियासी माहौल अशांति के दौर में है। ऐसे में लोकतांत्रिक सिद्धांतों और धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरा पैदा हो गया है। यही नहीं उन्होंने ईसाई धर्म के मानने वालों से प्रार्थना अभियान चलाने की अपील भी की थी।