राजनीति

दिल्ली में अधिकार की लड़ाई, एलजी के खिलाफ फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केजरीवाल सरकार

दिल्ली में अधिकारियों की तैनाती और तबादलों सहित सेवा से जुड़े विवादास्पद मुद्दे पर आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर सहमति जता दी है।

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Jul 10, 2018
Delhi Govt
दिल्ली में अधिकार की लड़ाई, एलजी के खिलाफ फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केजरीवाल सरकार

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच जारी हक की लड़ाई पर बेशक सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है लेकिन जंग अभी जारी है। दिल्ली में अधिकारियों की तैनाती और तबादलों सहित सेवा से जुड़े विवादास्पद मुद्दे पर आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर सहमति जता दी है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी कहा कि सरकार एकबार फिर सुप्रीम कोर्ट जा रही है।

चीफ जस्टिस की बेंच कर सकती है सुनवाई

दिल्ली सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने ट्वीट कर कहा कि प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अदालत में याचिका दायर हो गई है, और मामले का जल्द निपटारा करने का आग्रह किया गया है। राहुल मेहरा ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने संकेत दिया है कि मामला अगले सप्ताह उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। मेहरा ने कहा कि दिल्ली सरकार शीर्ष अदालत के पास इसलिए पहुंची है, क्योंकि अधिकारियों के स्थानान्तरण और तैनाती के अधिकार और शक्ति को लेकर अभी भी भ्रम है।

केजरीवाल बोले- सब मानो या कुछ भी मत मानो

सात जुलाई को अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के चार जुलाई के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार के पास नौकरशाहों की नियुक्ति और तबादला करने का अधिकार है और अगर केंद्र को इस पर किसी भी प्रकार का भ्रम है तो उसे सर्वोच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए। केजरीवाल ने कहा कि वे लोग कह रहे हैं कि वे फाइलों और फैसले के एक भाग को मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन सेवा पर दिए गए फैसले को नहीं मानेंगे। ऐसा नहीं होता है, या तो पूरा फैसला स्वीकार करें या न करें। आप अपने इच्छानुसार फैसले स्वीकार नहीं कर सकते।"

कोर्ट के आदेश की हो रही अवमानना: केजरीवाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत ने कहा है कि तीन मामलों (पुलिस, भूमि और सार्वजनिक व्यवस्था) को छोड़कर सेवा समेत सभी शक्तियां दिल्ली सरकार के पास हैं। फैसला अब एक कानून बन चुका है, वे लोग इसे नहीं मान रहे हैं। यह न्यायालय की अवमानना है।

Published on:
10 Jul 2018 08:57 pm
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