अचानक अस्पताल जाने को लेकर कई तरह की अफवाहें भी उड़ने लगी थीं। इसी बीच इलाज से पहले वाजपेयी ने हंसते हुए एक बयान दिया था।
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सोमवार को एम्स में भर्ती कराए जाने के बाद से ही पूरे देश में अचानक चिंता की लहर दौड़ गई। नियमित जांच के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एम्स प्रशासन और कई केंद्रीय मंत्रियों ने उनकी स्थिर सेहत को लेकर आश्वासन दे दिया था, लेकिन तब तक मीडिया में सरगर्मियां तेजी से बढ़ चुकी थीं। इसी बीच 17 साल पहले दिया अटल बिहार का एक बयान फिर से चर्चाओं में आ गया।
...इन वजहों से बढ़ी हलचल
सोमवार को दोपहर के समय उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम को सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, फिर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, इसके बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई कई दिग्गज सियासी हस्तियों ने उनसे एम्स में जाकर मुलाकात की। इनमें लाल कृष्ण आडवाणी, मोहन भागवत जैसे दिग्गज भी शामिल रहे। पहले लगातार मुलाकातें फिर मेडिकल बुलेटिन को लेकर एम्स की टालमटोली और अस्पताल से छुट्टी का फैसला दो बार स्थगित होने से भी प्रशंसकों में चिंता बढ़ गई। गौरतलब है कि पहले उन्हें सोमवार की रात साढ़े आठ बजे छुट्टी दी जानी थी, लेकिन फिर उन्हें रातभर अस्पताल में रखने का फैसला लिया गया। इसके बाद मंगलवार को भी उनकी छुट्टी टाल दी गई।
'जितना बीमार हूं उतना ही लिखो'
दरअसल, जून 2001 एक में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी घुटने का ऑपरेशन कराने के लिए मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल गए थे। अचानक अस्पताल जाने को लेकर कई तरह की अफवाहें भी उड़ने लगी थीं। इसी बीच इलाज से पहले वाजपेयी ने हंसते हुए एक बयान दिया था, 'जितना बीमार हूं उतना ही लिखें, ना कम ना ज्यादा।' अटल का यह बयान तब भी बहुत सुर्खियों में रहा था।