Highlights. बिहार चुनाव में NDA को पूरी तरह से स्पष्ट बहुमत मिल गया है बिहार में नीतीश लगातार चौथी बार सरकार बनाने जा रहे हैं
नई दिल्ली। बिहार चुनाव में एनडीए को पूरी तरह से स्पष्ट बहुमत मिल गया है। जिसके बाद नीतीश लगातार चौथी बार सरकार बनाने जा रहे हैं। वैसे चुनाव आयोग की तरफ से घाेषणा होना बाकी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि ऐसे कौन से कारण रहे जिन्होंने भाजपा और एनडीए की जीत की पटकथा लिख दी और आरजेडी व महागठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा।
1-महिलाओं की RJD से नाराजगी
बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी नीत एनडीए को मिली जीत के पीछे महिला फैक्टर को माना जा रहा है। चुनावी विश्लेषकों की मानें तो बिहार की महिलाओं ने लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में रेप, लूट, मार और गुंडागर्दी का दौर झेला है। माना जा रहा है कि इस बार बिहार चुनाव में महिलाओं ने सुरक्षा के मुद्दे पर एनडीए को चुना है। इसके साथ दूसरा बड़ा कारण बिहार में सीएम नीतीश यादव द्वारा की गई शराबबंदी भी रहा। विश्लेषकों के अनुसार महिलाओं ने शराबबंदी के नाम पर भी जेडीयू और एनडीए को बढ़ चढ़कर वोट किया है।
2- 10 लाख नौकरी का खोखला दावा
बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने अपनी सरकार आने पर 10 लाख नौकरी का वादा किया था। तेजस्वी ने कहा कि था कि सत्ता मिलने पर आरजेडी सरकार पहली ही कैबिनेट में युवाओं को 10 लाख नौकरी देगी। इसके साथ ही बिहारी युवाओं के लिए सरकारी नौकरी में आरक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी। हालांकि इस लोकलुभावन घोषणा का बिहार के युवाओं पर शुरुआती असर जरूर पड़ा, लेकिन नीतीश कुमार के बयान के बाद युवाओं को इस वादे मे कोई दम नहीं लगा। दरअसल, तेजस्वी का घोषणा पर पलटवार करते हुए नीतीश कुमार ने कहा था कि तेजस्वी 10 लाख नौकरी देने का दावा कर रह रहे हैं, लेकिन वह इतना बजट कहां से लाएंगे। अगर तेजस्वी बिहार का बजट और मौजूदा स्थिति को देखें तो उन्हे दाल-आटे के भाव का पता लग जाएगा। 10 लाख नौकरियां हवा में नहीं दी जाती।
3- भाजपा पर भरोसा
बिहार चुनाव में क्योंकि इस बार भारतीय जनता पार्टी को जेडीयू से भी अधिक सीटें मिले हैं। इसलिए माना जा रहा है कि मतदाता ने भाजपा की घोषणाओं और वादों पर भरोसा किया है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाना हो या फिर सीएए भाजपा ने अपने घोषणापत्रों में शामिल अधिकांश वादों को पूरा किया है। ऐसे में भाजपा ने लोगों को नौकरी देने की बजाए रोजगार देने का वादा किया था, जिसमें थोड़ी वास्तविकता नजर आती है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा बिहार में लोगों का विश्वास जीतने में कामयाब रही है।