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तो क्या इस वजह से स्मृति ईरानी से छीने गए कई अहम मंत्रालय?

इन वजहों से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से छीने गए कई अहम मंत्रालय।

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नई दिल्ली। मोदी सरकार में रातों रात कैबिनेट फेरबदल हुआ। इस फेरबदल ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से एक बार फिर से एक बड़ा मंत्रालय छीन लिया गया। बता दें कि आधी रात हुए इस फेरबदल में स्मृति से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय छीन लिया गया। अब यह मंत्रालय राज्यवर्धन सिंह राठौर को दे दिया गया है। लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है जो स्मृति से कोई मंत्रालय छीना गया हो।

ज्यादा दिनों तक नहीं रहा कोई भी मंत्रालय

बता दें कि 2014 में मोदी सरकार के अस्तित्व में आने पर मशहूर टीवी स्टार और बीजेपी नेता रही स्मृति को केंद्रीय मंत्री बनाते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय का पदभार सौंपा गया था। लेकिन यह मंत्रालय उनके पास ज्यादा दिनों तक नहीं रहा। स्मृति को मानव संसाधन मंत्रालय से हटाकर कपड़ा मंत्रालय दिया गया। इसके कुछ दिन बाद उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय दिया गया, लेकिन विवादों के कारण यह मंत्रालय भी उनसे छिन लिया गया। अब स्मृति के पास बस कपड़ा मंत्रालय है।

सूचना मंत्रालय छिनने की वजह

विवादों से स्मृति ईरान का पुराना नाता रहा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री बनने के बाद से अब तक जितने भी मंत्रालय संभाले हैं उनसे जुड़े लोगों से उनका टकराव हमेशा रहा है। ऐसा ही कुछ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मंत्री रहते हुए हुआ। आपको बता दें कि बीते कई दिनों से सूचना प्रसारण मंत्रालय कई विवादों में घिरा हुआ था। विवाद इतना बड़ा था कि प्रधानमंत्री कार्यालय भी इसकी निगरानी कर रहा था।

सामने आए कई विवाद

इस विवाद में मुख्य रूप में फिल्म पुरस्कार समारोह को लेकर उठा विवाद था। इस विवाद के तहत पुरस्कार के लिए चुने गए कई लोगों ने इस बात पर विरोध किया कि पुरस्कार राष्ट्रपति नहीं देंगे बल्कि मंत्री देंगी। वहीं, इस पर राष्ट्रपति कार्यालय ने भी आश्चर्य जाताया था। यह विवाद इतना बढ़ा कि इसे लेकर राष्ट्रपति कार्यालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत भी की। वहीं, सूचना मंत्रालय जाने की एक वजह प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) में कई अधिकारियों का स्थानांतरण भी रहा था।

मीडिया मॉनिटरिंग विवाद

वहीं, इससे पहले सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से एक सर्कुलर जारी किया गया था। इसके तहत सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया की मॉनिटरिंग किए जाने की बात कही गई थी। इसे लेकर पत्रकारों और पत्रकारों के संगठनों ने काफी विरोध किया था। विरोध की वजह से यह सर्कुलर वापस लेना पड़ा था। सूचना प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती के बीच भी विवाद चल रहा था।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय जाने की वजह

स्मृति को सबसे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय दिया गया था। यह मंत्रालय दिए जाने पर भी काफी विवाद हुआ था। स्मृति की कई कुलपतियों के साथ विवाद सामने आए थे। इन विवादों में सबसे ज्यादा स्मृति के बर्ताव और उनके काम करने के तरीके की शिकायत की गई थी।

अब बस रहेंगी कपड़ा मंत्री

जब स्मृति को मानव संसाधन मंत्रालय से हटाया गया था तो इसे एक चेतावनी माना गया था कि वो अपने काम करने का तरीका बदलें। इसके बाद उन्हें कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया। फिर कुछ दिन बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा भी सौंपा गया। लेकिन अब वह भी छीन गया है। अब वह बस कपड़ा मंत्री हैं।

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Updated on:
15 May 2018 11:17 am
Published on:
15 May 2018 11:51 am
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