कांग्रेस सपा और बसपा को आगे कर भाजपा की राह में रोड़ा डालने की कोशिश में जुटी।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में राहुल अखिलेश यादव को बड़ा भाई और मायावती को बड़ी बहन की भूमिका में लाने को तैयार हैं। अब सीटों पर के बंटवारों को लेेकर आम सहमति बनाई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यूपी में अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस का मनाना है कि यूपी में अखिलेश और मायावती को आगे कर पीएम नरेंद्र मोदी की जीत में सेंध लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव यूपी की 80 लोकसभा सीटें जीत की दिशा तय करेंगी। 2014 के चुनाव में भाजपा ने 71 सीटें यहां से जीतीं थीं। भाजपा को पूर्ण बहुमत दिलाने में इन सीटों का अहम योगदान रहा है। कांग्रेस इस बार कोई गलती न करके यूपी में अखिलेश और मायावती को सामने रखकर भाजपा का रास्ता रोकना चाहती है, चाहे उसे दोनों पार्टियों के मुकाबले सबसे कम सीटें ही क्यों न मिले।
रालोद के साथ छोटे दलों को लेकर परेशानी
सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन में एक और अड़चन कुछ छोड़ दल भी हैं। यह छोटे दल भी खास जगहों से सीटों मांग रहे हैं। इन दलों में रालोद सबसे आगे है। रालोद पश्चीमी यूपी से अधिक सीटों की मांग कर रहा है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि सपा और बसपा के बाद वह बचीकुची सीटों पर लड़ सकेगा। ऐसे में उसे मनपसंद सीटों पर समझौता भी करना पड़ सकता है। सपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना कि जब उनकी पार्टी यूपी में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है,तो इसमें किसी तरह की कोई आशंका नहीं होनी चाहिए कि उन्हें सबसे अधिक सीटें मिलें। उनका कहना है महागठबंधन में पार्टी के पिछले प्रदर्शन के आधार पर सीटें तय की जानी चाहिए।
अन्य राज्यों में कांग्रेस के लिए खड़ी होगी समस्या
यूपी में भले कांग्रेस समझौता कर ले, मगर मध्यप्रदेश और राजस्थान होने वाले विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में उसके कार्यकर्ता कोई समझौते के मूड में नहीं हैं। राहुल के लिए मुश्किले तब पैदा होगी,जब इन राज्यों में बसपा भी कांग्रेस से सीटों का बंटवारा चाहेगी। दरअसल मायावती ने पिछले दिनों एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि बसपा गठबंधन करके किसी भी पार्टी के साथ तभी चुनाव लड़ेगी जब उनकी पार्टी को गठबंधन में सम्मानजनक सीटें मिलेंगी। ऐसे में मायावती दूसरे राज्यों में कांग्रेस के लिए मसीबत बन सकतीं हैं।