राजनीति

भाजपा के लिए कितना कीमती आप का ‘विश्वास’

भाजपा से बढ़ती दिख रहीं कुमार विश्वास की नजदीकियां दिल्ली में एक खास सीट पर उतारने की तैयारी केजरीवाल से आखिरकार छूट रहा विश्वास का मोह
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Apr 04, 2019
kumar vishwas
भाजपा के लिए कितना कीमती आप का 'विश्वास'

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और ऐसे में कुमार विश्वास की भाजपा से बढ़ती नजदीकियां इस बात की तस्दीक कर रही हैं कि देर सवेर या हो सकता है कि चुनावों से पहले ही कुमार विश्वास ( kumar vishwas ) आम आदमी पार्टी ( AAP ) का साथ छोड़कर भाजपा ( BJP ) के पाले में आ जाएं। कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी में लंबे समय से निष्क्रिय हैं और चुनावों से पहले भाजपा को लेकर उनकी अप्रत्यक्ष सक्रियता लोगों की नजरों में आ गई है। हाल ही में भाजपा के दिल्ली ( delhi ) प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी से विश्वास की मुलाकात के बाद मीडिया ही नहीं अरविंद केजरीवाल ( arvind kejariwal ) भी लगभग मान बैठे हैं कि इस बार विश्वास को रोके रखना वाकई मुश्किल है।

केजरीवाल ने कब और क्यों तोड़ा कुमार का विश्वास

अन्ना आंदोलन के समय केजरीवाल और कुमार विश्वास के नजरिए और काम करने के तरीकों में भले ही कई समानताएं थीं लेकिन केजरीवाल के राजनीतिक मैदान में उतरते ही इन नजरियों के बीच बदलाव दिखने लगा था। कुमार विश्वास गाहे बगाहे अपनी कविताओं में इस बात का जिक्र करते आए हैं। दोनों के बीच तल्खियां तब ज्यादा बढ़ गईं जब केजरीवाल ने राज्यसभा के लिए पार्टी में योग्य होने के बावजूद कुमार विश्वास का नाम काट दिया। हालांकि उस वक्त भी कुमार विश्वास पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध रहे और उन्होंने केजरीवाल का साथ नहीं छोड़ा। लेकिन राज्यसभा न भेजे जाने का दुख विश्वास ने जरूर सबके सामने रखा।

कुमार ने तब मीडिया से कहा था कि उन्हें सर्जिकल स्ट्राइक , टिकटों में गड़बड़ी जैसे मसलों पर सत्य बोलने का दंड मिला है, वो इस दंड को स्वीकार करते हैं। इतना नहीं नहीं केजरीवाल पर तंज कसते हुए कुमार विश्वास ने कहा था कि अरविंद मुझे कह चुके हैं 'सर जी आपको मारेंगे लेकिन शहीद नहीं होने देंगे। मैं उनको बधाई देता हूं और अपनी शहादत को स्‍वीकार करता हूं, हालांकि युद्ध का भी एक नियम होता है कि शहीदों के शव से छेड़छाड़ नहीं की जाती'।

अबकी बारी न दोस्ती ना यारी

माना जा रहा है कि कुमार विश्वास अब लंबे समय तक केजरीवाल का साथ नहीं दे पाएंगे। एक एक करके लगभग नौ नेता केजरीवाल का साथ छोड़ चुके हैं, इनमें योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आशुतोष, आशीष खेतान, कपिल मिश्रा, शांति भूषण और शाजिया इल्मी जैसे जाने माने नाम शामिल हैं। अब केजरीवाल के पास मनीष सिसोदिया और कुछ ही भरोसेमंद लोग बचे हैं। ऐसे में विश्वास का साथ छोड़ना केजरीवाल के लिए भारी पड़ सकता है। एक एक करके जब कई साथियों ने केजरीवाल को छोड़ा तो एक सभा में विश्वास ने कहा था कि छोड़कर गए लोगों को वापस लाने की जरूरत है क्योंकि वो आप की नींव से जुड़े हैं। लेकिन केजरीवाल ने विश्वास की इस सलाह पर ध्यान नहीं दिया और विश्वास केजरीवाल से कटते गए।

भाजपा को आखिर क्यों चाहिए विश्वास

भाजपा लंबे समय से विश्वास का विश्वास हासिल करने का प्रयास करती आ रही है। उधऱ केजरीवाल भले ही भाजपा के लिए कितना कटु नजरिया रखते हों लेकिन विश्वास के मुखारविंद से कभी भाजपा के लिए बुरा नहीं निकला। विश्वास और भाजपा के रिश्ते कई सालों से सहज रहे हैं औऱ यही कारण है कि विश्वास गाहे बगाहे भाजपा की कुछ नीतियों की सरेआम तारीफ भी करते आए हैं।

दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर जातीय समीकरण बैठाने का जुगाड़ रही भाजपा को लगता है कि पूर्वी दिल्ली एक ऐसी सीट है, जहां ब्राह्मण फैक्टर हावी रहता आया है। भाजपा को लग रहा है कि कुमार विश्वास पूर्वी दिल्ली की सीट जीत सकते हैं औऱ यही सोच कर मनोज तिवारी ने कुमार विश्वास से मुलाकात भी की थी। हालांकि अंतिम फैसला अमित शाह ( Amit Shah )को करना है। लेकिन अगर यह रणनीति सफल भी रही तो कांग्रेस और आप दोनों को नुकसान पहुंचना तय है।

दूसरी तरफ कुमार विश्वास के रूप में भाजपा को एक स्टार प्रचारक मिलेगा। दिल्ली में केजरीवाल की नस नस पहचानने वाले कुमार विश्वास को साथ लाने में भाजपा कितना सफल होती है, ये तो देर सवेर पता पता चलेगा लेकिन इतना तय है कि आम आदमी पार्टी में तानाशाह साबित होते रहे केजरीवाल के लिए ये नुकसानदेय साबित होगा।

Updated on:
04 Apr 2019 02:04 pm
Published on:
04 Apr 2019 02:04 pm