222 सीटों के लिए होने वाले इन चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रचार के दौरान पूरा जोर लगा दिया था।
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग शनिवार सुबह 7 बजे शुरू हो गई है। 222 सीटों के लिए होने वाले इन चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पूरा जोर लगा दिया था। भाजपा की और से पीएम मोदी, अमित शाह आदि चुनाव मैदान में थे तो कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अकेले राहुल गांधी ने मोर्चा संभाल रखा था। पीएम मोदी ने इन चुनावों में अपना पूरा दमखम झोंक दिया था और उन्होंने कर्नाटक में ताबड़तोड़ सभाएं कीं। ये चुनाव कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि वह सत्ता में है और पिछले दिनों एक के बाद एक राज्य हाथ से निकलने के बाद कर्नाटक अकेला बड़ा राज्य है जहां पार्टी सत्ता में है वहीं भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अपनी उम्मीदें जिन्दा रखने के लिए यह चुनाव काफी अहम हैं।
कर्नाटक चुनाव की मुख्य बातें
- कर्नाटक विधानसभा की 222 सीटों के लिये मतदान सुबह 7 बजे शुरू हो गया है जो शाम 5 बजे तक चलेगा।
- जया नगर सीट पर बीजेपी प्रत्याशी की मौत के बाद चुनाव स्थगित कर दिया गया है।
- आर आर विधानसभा सीट पर 10,000 वोटर आईडी कार्ड मिलने के बाद भी मतदान रद्द कर दिया गया है।
- कांग्रेस और भाजपा के लिए कर्नाटक विधानसभा प्रतिष्ठा का प्रश्न है।
- यदि कांग्रेस चुनाव हार जाती है तो पार्टी के हाथ से 2019 में मोदी के खिलाफ संभावित मोर्चे का नेतृत्व निकल सकता है।
- कांग्रेस के हाथ से सभी बड़े प्रदेश निकल चुके हैं। ऐसे में कर्नाटक चुनाव उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
- बीजेपी के लिये भी ये चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण है।दक्षिण में उसकी स्थिति बेहद कमजोर है जहां से लोकसभा की १३० सीटें आती हैं।
- 2013 में हुये चुनाव के दौरान बीएस येदियुरप्पा ने अलग पार्टी बना ली थी जिससे भाजपा को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था।
- बीजेपी ने इस बार भी येदियुरप्पा को सीएम पद का दावेदार बनाया है और वह शिमोगा के शिकारीपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं।
- कांग्रेस ने भी वर्तमान सीएम सिद्दारमैया पर दाव खेला है। वह चामुंडेश्वरी और बादामी से चुनाव लड़ रहे हैं।
- कांग्रेस को सिद्दरामैया की दोनों सीटों पर बीजेपी और जेडीएस से कड़ी टक्कर मिल रही है।
- कांग्रेस ने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देकर उन्हें लुभाने की कोशिश की है।
- भाजपा ने सिद्दरामैया सरकार द्वारा किये गए भ्रष्टाचार पर निशाना साधा है।
- कर्नाटक में 1985 के बाद किसी सरकार ने दोबारा वापसी नहीं की है।