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कर्नाटक चुनाव: परिणामों का 2019 के लोकसभा चुनाव पर क्या होगा असर

ओपिनियन पोल के मुताबिक कर्नाटक में कांटे की लड़ाई है। जनता दल सेक्युलर यहां किंग मेकर की भूमिका निभा सकती है।

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Karnataka election

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग सुबह 7 बजे शुरू हो गई है। 222 सीटों के लिए होने वाले इन चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पूरा जोर लगा दिया था। भाजपा की और से पीएम मोदी, अमित शाह आदि चुनाव मैदान में थे तो कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अकेले राहुल गांधी ने मोर्चा संभाल रखा था। पीएम मोदी ने इन चुनावों में अपना पूरा दमखम झोंक दिया था और उन्होंने कर्नाटक में ताबड़तोड़ सभाएं कीं। ये चुनाव कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि वह सत्ता में है और पिछले दिनों एक के बाद एक राज्य हाथ से निकलने के बाद कर्नाटक अकेला बड़ा राज्य है जहां पार्टी सत्ता में है। वहीं भाजपा के मिशन 2019 के लिए कर्नाटक में सफलता एक अहम कड़ी है।

कर्नाटक चुनाव लाइव

भाजपा की संभावनाएं

कर्नाटक में इस बार भाजपा ने कोई चांस नहीं लिया और चुनाव प्रचार में पूरा दम झोंक दिया। इन चुनावों के जरिये भाजपा दक्षिण में कमल खिलाने की कोशिश कर रही है क्योंकि कर्नाटक के अलावा दक्षिण में भाजपा के पास जनाधार वाला कोई अन्य राज्य नहीं है।कर्नाटक चुनाव जीतने के बाद भाजपा की पैठ दक्षिण भारतीय अन्य राज्यों में होने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा दक्षिण भारतीय मतदाताओं के बीच पार्टी की विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।

राजनितिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी चुनाव से 2019 के लोक सभा का रास्ता तय होगा। हिंदी भाषा भाषी राज्यों में परचम लहराने के बाद भाजपा के भविष्य के लिए दक्षिण का यह बड़ा राज्य बहुत मायने रखता है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस बार लोकसभा चुनावों में मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रहने वाली है। इस आशंका के मद्देनजर भी कर्नाटक का चुनाव जीतना भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है ताकि मध्यप्रदेश और राजस्थान से होने वाले नुकसान को कुछ हद तक भरा जा सके। बता दें कि कर्नाटक से लोकसभा की 28 सीटें आती है।

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कांग्रेस का भविष्य

कर्नाटक के नतीजे कांग्रेस के लिए अहम परीक्षा हैं।कर्नाटक के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व क्षमता की परीक्षा होगी। एक के बाद कई राज्यों में चुनाव हार चुकी कांग्रेस पार्टी अपना गढ़ बचाने की कोशिश में होगी। कर्नाटक के अलावा अब कांग्रेस के पास कोई अन्य महत्वपूर्ण और बड़ा राज्य नहीं बचा है। इसलिए कांग्रेस ने भी इन चुनावों को गंभीरता से लेते हुए अब तक बहुत ही सफाई से दांव खेला है।

जेडीएस का त्रिकोण

ओपिनियन पोल की मानें तो इस बार कर्नाटक में लड़ाई बेहद कठिन है। जनता दल सेकुलर यहां सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। त्रिशंकु विधान सभा की आशंकाओं के बीच जनता दल सेकुलर यहां किंग मेकर की भूमिका में है। यही कारण है कि भाजपा अथवा कांग्रेस दोनों ने यहां जेडीएस पर चुनाव प्रचार के दौरान कोई बड़ा हमला नहीं किया है। एक तरफ जहां पीएम मोदी, जेडीएस नेता एच डी देवेगौड़ा की तारीफ करते नजर आये तो वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी जेडीएस से गठबंधन के सवाल पर मौन रह गए।