राजनीति

कैराना उपचुनाव: पीएम मोदी के क्रेज पर बड़ा सवाल, भाजपा के लिए खतरे की घंटी

कैराना उपचुनाव में भाजपा की हार साबित करती है मोदी लहर खत्म हो रही है और यह 2019 आम चुनाव के दौरान विपक्ष के लिए बेहतर साबित हो सकती है।
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Updated: 1 Jun 2018, 3:53 PM IST
PM Modi
PM Modi

नई दिल्‍ली। आगामी मार्च-अप्रैल 2019 में लोकसभा का चुनाव होगा। सत्‍ताधारी भारतीय जनता पार्टी काम के बल पर चुनाव लड़ने को लेकर हुंकार भर रही है। लेकिन कैराना उपचुनाव के परिणाम ने भाजपा को चौंका दिया है। यहां का चुनाव परिणाम जहां पीएम मोदी के लिए खतरे की घंटी है। वहीं, विपक्षी दलों में यह चुनाव परिणाम जीत की उम्‍मीद बांधने वाला है। बशर्ते कि विपक्षी दल कैराना की तरह एक साथ मिलकर पीएम मोदी के खिलाफ 2019 में लोकसभा का चुनाव लड़ें। फिलहाल लोकसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है और सत्ताधारी भाजपा को हाल के लगभग सभी उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा है।

2014 के बाद कुल 27 लोकसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं। इनमें से केवल पांच सीटों पर ही भाजपा को जीत मिली। अगर इस जीत के हिसाब से कामकाज और सत्‍ता में दोबारा वापसी की बात की जाए तो पीएम मोदी का दोबारा पीएम बनना मुश्किल है। कैराना का चुनाव परिणाम सवाल उठा रहा है कि क्या भारत की चुनावी राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के प्रभुत्व के दिन लदने वाले हैं? क्या भाजपा विपक्ष की एकजुटता की कोई काट निकाल पाएगी? अगर नहीं तो भाजपा की नैया 2019 में कैसे पार होगी।

इसी तरह हाल ही में संपन्‍न चार लोकसभा सीटों पर उपचुनाव में भाजपा को केवल एक सीट पालघर पर जीत मिली है। महाराष्ट्र के पालघर से भाजपा और नगालैंड की सोल सीट से एनडीपीपी को जीत मिली है। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों में कुल 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में केवल उत्तराखंड की थराली सीट पर केवल भाजपा को जीत मिली है। महाराष्ट्र की बंडारा-गोंडिया लोकसभा सीट से एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन को जीत मिली है।

कैराना की जीत अहम क्‍यों?

इस उपचुनाव में विपक्ष को सबसे बड़ी जीत उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट पर मिली है। इस सीट से राष्ट्रीय लोकदल की उम्मीदवार तबस्सुम हसन को सभी विपक्षी पार्टियों का समर्थन हासिल था। इससे पहले उत्तर प्रदेश के ही गोरखपुर और फूलपुर में भाजपा की करारी हार के दो महीने बाद कैराना में पार्टी को मुंह की खानी पड़ी है। गोरखपुर, फूलपुर और कैराना तीनों सीटों पर 2014 के आम चुनाव में भाजपा को जीत मिली थी। कैराना पश्चिम उत्तर प्रदेश में है और 2013 में यह इलाका सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आया था और धार्मिक ध्रुवीकरण भी हुआ था। यह ध्रुवीकरण 2014 के आम चुनाव में भी देखने को मिला था।

झारखंड में भाजपा सत्ता में है और वहां भी विधानसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्च से हार मिली है। हालांकि पहले भी ये दोनों सीटें जेएमएम के पास ही थीं। हाल ही में भी जेडीयू और भाजपा गठबंधन को जोकीहट विधानसभा सीट के उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल से हार मिली। इनमें से कैराना लोकसभा सीट पर भाजपा की हार के बारे में विपक्ष का कहना है कि यह सांप्रदायिकता की हार है और एक बार फिर से जाट और मुसलमान राजनीतिक रूप से साथ आ रहे हैं, जो भाजपा के लिए खतरे की घंटी की तरह है।

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