यूपी के तत्कालीन सीएम राजनाथ सिंह की सरकार के समय बीजेपी पर कई आरोप लगते थे जिसके चलते बीजेपी एक बार सत्ता से बाहर गयी तो १४ साल तक भगवा पार्टी की वापसी नहीं हुई। बीजेपी जब सत्ता से बाहर थी तो उस समय सपा व बसपा ही प्रदेश पर शासन करती थी इसका मुख्य कारण इन दोनोंं दलों की सोशल इंजीनियरिंग मजबूत होना था। बसपा के साथ दलित व पिछड़े वर्ग का बड़ा भाग जुड़ता था और मुस्लिम वोटर भी साथ आते थे तो प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार मिली थी सपा के साथ यादव व सवर्ण वर्ग के वोटर जुड़ते थे यहां भी मुस्लिम जुड़ते थे तो प्रदेश की सत्ता पर सपा का कब्जा होता था। बीजेपी ने संसदीय चुनाव 2014 व 2017 के बाद सोशल इंजीनियरिंग ठीक की थी जिसके चलते यूपी में प्रचंड जीत मिल थी लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर संघ के नाम पर कुछ नेता खास जाति कार्ड खेल रहे हैं जिसके चलते बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग कमजोर हो गयी है जिसका उदाहरण फूलपुर, गोरखपुर के बाद कैराना उपचुनाव में देखना को मिला है और भगवा पार्टी को हार का समाना करना पड़ा है।
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