
नई दिल्ली। रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर केंद्र सरकार ने अपने कड़े तेवर एक बार फिर जाहिर कर दिए हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजीजू ने बुधवार को कहा, 'सरकार का नजरिया सबके सामने है। रोहिंग्या गैरकानूनी प्रवासी हैं और उन्हें भारत में फलने-फूलने का मौका नहीं दिया जाएगा।' उधर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मसले पर बयान दिया है, उन्होंने कहा कि सभी राज्य सरकारों को जांच कर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि रोहिंग्याओं के पास भारतीय दस्तावेज न हों।
बांग्लादेश ने भी लगाई थी भारत से गुहार
पिछले महीने राज्य सरकारों को लिखे एक पत्र में केंद्र ने कहा था कि गैरकानूनी प्रवासियों को देश में घुसने से रोका जाए। हाल ही में भारत दौरे पर आईं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी रोहिंग्याओं को वापस म्यांमार भेजने में भारत से अहम भूमिका निभाने की उम्मीद जताई थी। गौरतलब है कि म्यांमार में आंतरिक हिंसा के बाद रोहिंग्याओं ने दूसरे देशों का रुख किया था। बांग्लादेश में हजारों की तादाद में रोहिंग्याओं ने शरण ली थी। इसके बाद कई तरह की समस्याएं नजर सामने आई थीं।
'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है रोहिंग्या'
भारत सरकार ने इससे पहले भी कई बार रोहिंग्या से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने की बात कही है। म्यांमार से भागे रोहिंग्याओं में से अधिकांश भारत में जम्मू, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में रह रहे हैं। भारत में इस मुद्दे पर लंबे समय से बहस चलती रही है और सुप्रीम कोर्ट ने भी रोहिंग्याओं को लेकर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि रोहिंग्या सुप्रीम कोर्ट में जा सकते हैं।