जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीयत पर संदेह नहीं करना चाहिए। हमारे यहां परंपरा रही है, 'मौजूदा मुख्य न्यायाधीश ही अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश करते हैं। सिफारिश के बाद सरकार उसे देखेगी।'
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के चयन को लेकर केंद्र सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा गया था कि क्या सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई होंगे? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीयत पर संदेह नहीं करना चाहिए। हमारे यहां परंपरा रही है, 'मौजूदा मुख्य न्यायाधीश ही अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश करते हैं। सिफारिश के बाद सरकार उसे देखेगी।'
ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल थे जस्टिस गोगोई
गौरतलब है कि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा जस्टिस के प्रशासनिक कामकाज और मुकदमों के आवंटन को लेकर चार वरिष्ठ जजों ने सवाल उठाते हुए एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इनमें अब सेवानिवृत न्यायाधीश जे चेलमेश्वर के अलावा जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे। चेलमेश्वर की सेवानिवृति के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजन गोगोई ही दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं।
न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी बोले
रविशंकर प्रसाद ने न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर बनाए जाने वाले मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (नियुक्ति प्रक्रिया) को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा, 'इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश सरकार को भेज रखी है, जिसकी फाइल सरकार के पास है। इस संबंध में बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक कुछ भी फाइनल नहीं हो पाया है।'
न्यायपालिका की हालत सुधारने पर बोले...
- अप्रैल 2015 से लेकर मई 2018 के बीच सुप्रीम कोर्ट के 18 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है जबकि उच्च न्यायालयों के 331 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है।
- 2016 में पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा 126 हाईकोर्ट न्यायाधीशों की नियुक्ति हुई। इसके साथ ही उच्च न्यायालयों में 313 के अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी किया गया।
- निचली अदालतों में 1613 न्यायाधीशों की नियुक्ति हुई है।
- सरकार ने अपना औचित्य खो चुके 1824 कानूनों को चिन्हित किया है, जिन्हें रद्द किया जाना है। ऐसे 1428 कानून रद्द किए जा चुके हैं।
- 2015 में 281 फास्ट ट्रैक कोर्ट थीं, जो अब बढ़कर 727 हो चुकी है।