राजनीति

मिशन 2019: विपक्षी खेमे में मायावती क्‍यों बनीं हर किसी की मजबूरी?

अखिलेश यादव 2017 में विधानसभा चुनाव पार्टी की बुरी हार के बाद से ही बसपा से गठबंधन को लेकर प्रयासरत हैं।

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मिशन 2019: विपक्षी खेमें मायावती क्‍यों बनीं हर किसी की मजबूरी?

नई दिल्‍ली। मिशन 2019 के लिहाज से विपक्षी राजनीति की बात करें तो कांग्रेस सहित सभी दलों के लिए बसपा प्रमुख मायावती अहम जरूरत बन गई हैं। यही कारण है कि एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्‍थान विधानसभा में कांग्रेस से गठबंधन नहीं होने के बाद भी पार्टी ने लोकसभा में गठबंधन की संभावनाओं को खारिज नहीं किया है। इतना ही नहीं सपा, जोगी की पार्टी, इंडियन नेशनल लोकदल, टीएमसी, एनसीपी, आरएलडी, सभी पार्टियां बसपा को साथ लेकर चलना चाहती हैं। इसी तरह दक्षिण की पार्टियों में टीडीपी जेडीएस और डीएमके को भी साथ लेकर चलने की है। ऐसे में अहम सवाल यह उठता है कि जोगी से लेकर चौटाला तक को क्‍यों चाहिए मायावती का साथ?

चौटाला ने की माया को पीएम बनाने की बात
चौधरी देवीलाल की 105वीं जयंती के मौके पर इनेलो नेता ओम प्रकाश चौटाला की ओर से मायावती को लेकर दिया गया बयान हरियाणा ही नहीं देश की मौजूदा राजनीति के हिसाब से भी काफी मायने रखता है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती को अगला पीएम बनाने की बात कही है। उनका कहना है कि हम साथ काम करके सभी विपक्षी दलों को एक कर मायावती को अगला पीएम बनाने का काम करेंगे। उनका ये बयान हरियाणा ही नहीं देश की मौजूदा राजनीति के हिसाब से भी काफी मायने रखता है।

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1998 में मिलकर लड़ा था चुनाव
हरियाणा में दो दशक पहले भी दोनों मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं। वैसे भी हरियाणा में बीएसपी का प्रभाव रहा है। 1998 के लोकसभा चुनाव में भी आईएनएलडी और बीएसपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। आईएनएलडी छह और बीएसपी ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा जिसमें आईएनएलडी के खाते में चार और बीएसपी के खाते में एक सीट आई थी। यानी दोनों दलों के गठबंधन ने 10 में से 5 सीटों पर कब्जा जमा लिया था। 1999 में आईएनएलडी ने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया था। अब आईएनएलडी और बीएसपी ने 2019 के संसदीय चुनावों से पहले हरियाणा में गठबंधन बनाया है। ऐसा कर दोनों पार्टियां एक बार फिर बीस साल पहले के फॉर्मूले को आजमाने की तैयारी में है।
छत्तीसगढ़ में बसपा गठबंधन
छत्तीसगढ़ में बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को गच्‍चा देते हुए अमित जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छ्त्तीसगढ़ से गठबंधन कर कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने चुनौती पेश कर दी है। छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 55 पर जोगी की पार्टी और 35 सीटों पर मायावती की पार्टी चुनाव लड़ेगी। जोगी से गठजोड़ कर बसपा प्रमुख ने कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका दिया। बताया जा रहा है कि बसपा को छत्तीसगढ़ में वोटों की संख्‍या के लिहाज से अच्‍छा खासा प्रभाव रहा है। इसका असर विधानसभा चुनाव में दिख सकता है।

सपा भी गठजोड़ के लिए आतुर
दूसरी तरफ बीएसपी ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के साथ गठबंधन की सभी संभावनाओं को खत्म कर अलग चुनाव लडने का ऐलान कर दिया है। इसके बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में मायावती को साथ लेने की कोशिश में अभी भी लगे हुए हैं। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव बसपा प्रमुख से ज्‍यादा तवज्‍जो न मिलने के बाद भी उन्‍हें साथ गठबंधन के आधार पर चुनाव लड़ने को लेकर गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं। वैसे अखिलेश यादव 2017 में बुरी तरह से विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही बसपा से गठबंधन को लेकर प्रयासरत हैं।

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Published on:
09 Oct 2018 08:08 am
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