
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है। महत्वपूर्ण माने जा रहे इस सत्र में एक तरफ सरकार लंबित बिलों को पारित करने की कोशिश करेगी वहीं विपक्ष ने भी सरकार को बैकफुट पर धकेलने की पूरी तैयारी कर ली है। टीडीपी के बाद अब कांग्रेस ने भी बुधवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात दोहराई है।
एकजुट हुआ विपक्ष
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विपक्ष एकजुट है तथा इसके जरिये वह सरकार को घरने की कवायद में लग गया है। बताया जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव को लेकर करीब एक दर्जन दलों में सहमति बन गई है। जो दल अभी तक इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर रहे हैं उनको साथ लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजादने मंगलवार को कहा कि विपक्षी दलों की सोमवार को हुई बैठक में इस बारे में व्यापक चर्चा हुई है और अब तक 12 दलों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमति व्यक्त की है।
कांग्रेस और टीडीपी लाएंगे प्रस्ताव
विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा ने जनता से जो वादे किए थे उन्हें पूरा करने में असफल रही है। सरकार ने बेरोजगारी, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने, काला धन वापस लाने, रुपए को मजबूत करने, मॉब लिंचिंग पर रोक लगाने जैसे कई वादे किए थे लेकिन उसने इन वादों को पूरा नहीं किया है। विपक्ष का आरोप है कि लोगों का ध्यान भटकाने के लिए सरकार घृणा और भेदभाव की नीति अपना रही है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार सभी मुद्दों पर विफल रही है इसलिए उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना जरुरी है। पार्टी इन सभी मुद्दों पर संसद में व्यापक चर्चा कराएगी।
उधर आंध प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर टीडीपी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। टीडीपी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने आंध प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का आश्वासन दिया था लेकिन पिछले चार वर्ष के दौरान लोगों से किए गए इस वादे पर मोदी सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है ।