
सबरीमाला मंदिर: महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ करेगी फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक से जुड़ी याचिका पर सुनवाई मंगलवार से शुरू हो गई। सबरीमाला मंदिर में दस साल से पचास तक की महिलाओं के प्रवेश पर रोक है। 13 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की खंडपीठ ने संविधान में उल्लखित समानता के अधिकार, लिंग, धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव न किये जाने का अधिकार तथा छुआछूत जैसे सवालों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को पांच जजों की संविधान पीठ के हवाले कर दिया था।
शुरू हुई सुनवाई
मंगलवार को इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई। न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे तीन न्यायधीशों की पिछली पीठ द्वारा पिछले साल भेजे गये सवालों तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें। इस पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर , न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा शामिल हैं।
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर 'द इंडियन यंग लायर्स एसोसिएशन' ने लगे प्रतिबंध को चुनौती दी है । बता दें कि सबरीमाला में पिछले सैकड़ों सालों से महिलाओं के प्रवेश को लेकर प्रतिबंध है। याचिका में केरल सरकार, द त्रावनकोर देवस्वम बोर्ड और मंदिर के मुख्य पुजारी सहित जिलाधिकारी को पार्टी बनाया गया है।। सात नंवबर 2016 को सुनवाई के दौरान केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि वह मंदिर में सभी महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में है।
क्या है मामला
सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल तक की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। यहां सिर्फ छोटी बच्चियां और बूढ़ी महिलाएं ही प्रवेश कर सकती हैं। पत्थनमथिट्टा जिले में पश्चिमी घाट की एक पहाड़ी पर स्थित सबरीमाला मंदिर के प्रबंधन का कहना है कि रजस्वला होने की वजह से 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाएं अपनी व्यक्तिगत शुद्धता बनाये नहीं रख सकती हैं, इसलिए इस आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश मंदिर में वर्जित है। सबरीमाला मंदिर हर साल नवम्बर से जनवरी तक श्रद्धालुओं के लिए खुलता है।
Published on:
18 Jul 2018 09:18 am
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