
mp highcourt news : sasti bijli kaha milti hai
शहडोल. न्यायालयों में लंबे समय से पेंडिंग अनसुलझे प्रकरणों का भार लोक अदालतें कम कर रही हैं। सिविल प्रक्रिया के अलावा कई आपराधिक प्रकरणों की लोक अदालत सुनवाई कर रही हैं। लोक अदालतों से जहां हजारों लोगों को न्याय मिला है, वहीं दूसरी ओर लोक अदालतों ने कई बिछड़े परिवारों को भी मिलाया है। पिछड़े डेढ़ साल में 8 लोक अदालतों का आयोजन किया गया, जहां पर दो हजार से ज्यादा प्रकरणों का निपटारा किया गया। अधिकांश प्रकरण काफी लंबे समय से अलग- अलग न्यायालयों में लंबित थे। जिन्हे न्यायालय द्वारा लोक अदालतों में रेफर किया गया। जहां पर सुनवाई करते हुए प्रकरणों का निपटारा किया है। इसमें सिविल प्रक्रिया से जुड़े मामलों के साथ ही आपराधिक प्रकरणों में समझौता के मामले शामिल हैं। अधिकारियों की मानें तो लोक अदालतों के शुरू हो जाने से निर्णय के लिए अब फरियादी को सालों इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। हालांकि लोक अदालतों के लिए रेफर किए गए कई मामले भी लंबित हैं, जिन पर सुनवाई करते हुए जल्द निपटारे का प्रयास किया जा रहा है।
लोक अदालतों में करोड़ों का अवार्ड पारित
अधिकारियों के अनुसार 17 माह में आयोजित 8 लोक अदालतों में करोड़ों रुपए का अवार्ड भी पारित किया है। इंश्योरेंस सहित कई मामलों में अवार्ड पारित करते हुए फरियादी को राशि भी दिलाई है। उधर क्रिमिनल संबंधी मामलों में आर्डर पारित करते हुए भेजा गया है।
सुलह का बेहतर माध्यम
जिला विधिक सेवा अधिकारी बीडी दीक्षित के अनुसार आपसी सुलह का लोक अदालत सबसे बेहतर माध्यम है। समझौते के बीच प्रकरणों के निराकरण का प्रयास किया जाता है। पिछले 17 माह में 2045 मामलों का निपटारा किया गया है, जिन्हे न्यायालय द्वारा रेफर किया गया था।
कब कितने केसों का निपटारा
फरवरी 2017 - रेफर केस 2494, निपटारा 353
अप्रैल 2017- रेफर केस 2525, निपटारा 222
जुलाई 2017- रेफर केस 3099 निपटारा 322
सितंबर 2017 - रेफर केस 2537, निपटारा 244
दिसंबर 2017- रेफर केस 3076, निपटारा 382
फरवरी 2018- रेफर केस 1652 निपटारा 182
अप्रैल 2018- रेफर केस 1910, निपटारा 161
जुलाई 2018 रेफर केस 1981 निपटारा 179
Published on:
17 Jul 2018 07:34 pm
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