पूर्व राष्ट्रपति की यह किताब उनकी आत्मकथा श्रृंखला के चौथे हिस्से के रूप में होगी। अपनी श्रेणी में पहली बताई जा रही यह किताब दिसंबर में प्रकाशित होगी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में शामिल होकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा चुके पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी एकबार फिर पार्टी की नींद उड़ाने वाले हैं। प्रणब दा ने अब अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान हुई सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और अन्य प्रसिद्ध घटनाओं के अंदर की कहानी पर एक किताब लिखने का फैसला किया है।
प्रणब दा की आत्मकथा का चौथा हिस्सा
पूर्व राष्ट्रपति की यह किताब उनकी आत्मकथा श्रृंखला के चौथे हिस्से के रूप में होगी। अपनी श्रेणी में पहली बताई जा रही यह किताब दिसंबर में प्रकाशित होगी और इसमें भारत के 13वें राष्ट्राध्यक्ष के कार्यकाल का संपूर्ण विवरण है। 'द प्रेसिडेंशियल ईयर्स' का प्रकाशन अधिकार 'रूपा पब्लिकेशंस' के पास है, जिसने मुखर्जी की आत्मकथा के पिछले तीनों भागों- 'द ड्रामेटिक डिकेड', 'द टब्र्यूलेंट ईयर्स' और 'द कोलीजन ईयर्स' का भी प्रकाशन किया था।
नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक पर कहेंगे 'मन की बात'
पब्लिकेशन ने एक बयान में कहा कि आत्मकथा के इस भाग को पढ़ने के बाद पाठकों को राष्ट्रपति भवन की कार्यप्रणाली, उस समय चर्चा में रहे मुद्दों की अंदरूनी खबरों को करीब से जानने का मौका मिलेगा। इनमें अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन से लेकर नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक, मुखर्जी के प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार से रिश्ते और विधायिका, कार्यकारी और न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका मिलेगा। प्रणब मुखर्जी की आत्मकथा श्रृंखला की पिछली किताब 'द कोलीजन ईयर्स' ने राजनीतिक नजरिया प्रदान करने के साथ-साथ कुछ दुर्लभ रहस्यों से भी रूबरू कराया था।
मोदी सरकार की योजनाओं के साथ खड़े रहे हैं प्रणब दा
बता दें कि प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति पद पर रहते हुए और उससे बाद भी मोदी सरकार की किसी भी योजना का विरोध नहीं दिया है। उनके कार्यकाल के दौरान ही देश में जीएसटी लागू हुआ। पद से हटने के बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि जीएसटी लागू होने से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन शुरुआत में थोड़ी दिक्कतों का सामना तो करना पड़ा। जीएसटी के अलावा नोटबंदी पर भी प्रणब मुखर्जी मोदी सरकार के साथ खड़े रहे हैं।