राजनीति

लोकसभा: प्रोजेक्ट ‘शक्ति’ के दम पर राहुल गांधी जीतेंगे मोदी के खिलाफ 2019 का चुनाव

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी यह समझ गए हैं कि डेटा का प्रभाव इस्‍तेमाल कर चुनावी हार को जीत में बदला जा सकता है।
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Aug 21, 2018
rahul gandhi
लोकसभा: प्रोजेक्ट 'शक्ति' के दम पर राहुल गांधी जीतेंगे मोदी के खिलाफ 2019 का चुनाव

नई दिल्‍ली। 2014 के बाद से लगातार मिलने वाली हार को जीत बदलने के लिए अचूक चुनावी हथियार कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को हाथ लग गया है। दरसअल, फरवरी, 2018 में राहुल गांधी को एक ऐसा आंकड़ा दिखाया गया जिसे जानकर वो हैरान रह गए। इस डेटा के जरिए विशेषज्ञों ने उन्‍हें यह समझाने की कोशिश की है कि अगर कांग्रेस पार्टी ने देश भर में पोलिंग बूथ को ठीक तरीके से संभाल लिया होता तो उनका वोट शेयर चार फीसदी बढ़ जाता। साल 2014 में कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली थी यानी अगर 4 फीसदी वोट मिला दिए जाएं तो ये संख्या बढ़ कर कम से कम 90 हो सकती थी। पर ऐसा नहीं हुआ और कांग्रेस को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा।

प्रोजेक्‍ट शक्ति
इसके बाद राहुल गांधी ने राजनीतिक अर्थशास्त्री प्रवीण चक्रवर्ती की अध्यक्षता में डेटा विश्‍लेषकों की एक टीम तैयार की थी। इस टीम को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी डेटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट नाम दिया गया है। इस टीम ने 'शक्ति' नाम के प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। इसका काम था डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में हर कांग्रेस कार्यकर्ता को राहुल गांधी के साथ जोड़ना। इस टीम ने कांग्रेस के लिए शक्ति डेटा बेस तैयार कर लिया है। इसका इस्तेमाल कई कामों के लिए किया जा रहा है। अब कांग्रेस पार्टी इसके जरिए सीधे किसी जिले में किसी बूथ पर कार्यकर्ताओं से सम्पर्क साध सकती है। प्रोजेक्‍ट शक्ति के बारे में कांग्रेस के डेटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट के अध्यक्ष प्रवीण चक्रवर्ती का कहना है कि यह एक आइडिया है जिसे राहुल गांधी एक राजनीतिक मंच कहते हैं।

राजस्‍थान में पहला प्रयोग
2018 में प्रोजेक्‍ट शक्ति को राजस्थान में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था। वहां पर इस साल के अंत में चुनाव होना है। राजस्थान के लिए कांग्रेस के महासचिव अविनाश पांडे कहना कहना है कि हमने राजस्थान में 'शक्ति' के जरिए 5.5 लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं का एनरोलमेंट कराया है। राजस्थान में इसकी कामयाबी के बाद इसे पार्टी ने नौ और राज्यों में लागू किया है। पार्टी के मुताबिक अब 25 लाख से ज्‍यादा कार्यकर्ता इस प्लेटफॉर्म से जुड़ गए हैं। सदस्यों को एसएमएस के जरिए अपने वोटर आईडी नंबर को किसी खास फोन नंबर पर भेजने के लिए कहा गया था। वेरिफिकेशन के बाद कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर उन्हें राहुल गांधी का एक संदेश भेजा। इन कार्यकर्ताओं को एक खास जिले में कांग्रेस पार्टी के लिए काम करने के लिए कहा गया।

विभिन्‍न श्रेणियों में बंटे हैं कार्यकर्ता
प्रोजेक्‍ट शक्ति के सदस्यों को छह श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों में मतदाता, सिमपैथिजर्स, कार्यकर्ता, सक्रिय कार्यकर्ता, पदाधिकारी और नेता शामिल हैं। यहां काम के आधार पर कार्यकर्ताओं को रैंकिंग भी दी जाती है. इससे पार्टी को रणनीति बनाने में मदद मिलती है। कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि यह सिस्‍टम भाजपा के मिस्ड कॉल एनरोलमेंट से अलग है। आज अगर हम जानना चाहे हैं कि छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बूथ संख्या 41 में हमारे पास कितने कार्यकर्ता हैं, तो मुझे शक्ति से सारी जानकारी मिल जाएगी।

तेजी से राय हासिल करने में सहायक
प्रोजेक्‍ट से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि इससे पार्टी को किसी मुद्दे पर कार्यकर्ताओं की राय लेने में भी मदद मिलती है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक नेता ने कहा कि जून में जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लेफ्टिनेंट गवर्नर के खिलाफ धरना पर बैठे थे, तो हमने दिल्ली में शक्ति के सारे सदस्यों से एक सवाल किया- क्या कांग्रेस पार्टी को अरविंद केजरीवाल के धरने का समर्थन करना चाहिए? हमने हर बड़े फैसले में कार्यकर्ताओं के विचारों को शामिल करना शुरू कर दिया है। इसका एक लाभ यह भी मिला है कि पार्टी में सारी चीजें अब काफी लोकतांत्रिक हो गई हैं।

Published on:
21 Aug 2018 02:18 pm