
नई दिल्ली। तमिलनाडु की एक जिला अदालत ने सम्मान के घमंड में ऑनर किलिंग जैसे अक्ष्मय अपराध को अंजाम देने वालों को अपने फैसले से एक शख्त संदेश दिया है। तिरुपुर जिले की एक अदालत ने ऑनर किलिंग मामले में 6 लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। इन छह दोषियों में लड़की के कौशल्या का पिता भी है, जिसने वर्ष 2016 में उसके पति शंकर की हत्या कर दी थी। जिसने वर्ष 2016 में उसके पति शंकर की हत्या कर दी थी।
लड़की ने पिता ने ही करवाई हत्या
13 मार्च 2016 को उडुमालीपट्टई शहर में बस स्टॉप के पास बाइक पर सवार बदमाशों ने 22 वर्षीय शंकर की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी थी। शंकर पर हुए इस हमले में कौशल्या को भी गंभीर चोटें आईं थीं। हमला कौशल्या के पिता ने करवाया, क्योंकि वो इस शादी से खुश नहीं थे। उन्होंने इस अंतरजातीय विवाह का विरोध किया था। पुलिस ने इस हत्या में 11 लोगों को हिरासत में लिया था, जिसमें कौशल्या के माता-पिता चिन्नास्वामी और अनलक्ष्मी और उनके मामा पांडिदुरै शामिल थे। इन लोगों पर 7 अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
कोर्ट का फैसला
मंगलवार को अदालत ने चिन्नासामी समेत पांच अन्य को मौत की सजा सुनाई, लेकिन कौशल्या की मां, चाचा और 16 वर्षीय किशोर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। शेष दो अभियुक्तों में स्टीफन धनराज को आजीवन कारावास और मानिकंदन को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।
क्या है पूरा मामला
घटना 13 मार्च 2016 को उस समय हुई, जब वी शंकर (23) पत्नी कौशल्या (19) के साथ टहल रहा था। शंकर इंजीनियरिंग का छात्र था। स्थानीय मीडिया में आए सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, उसी समय वहां बाइक से तीन लोग पहुंचे। उन्होंने धारदार हथियारों से शंकर पर हमला कर दिया। इसके बाद उसकी पत्नी को भी निशाना बनाया। शंकर दलित समुदाय का था, जबकि कौशल्या खुद को जमींदार मानने वाले थेवर जाति से ताल्लुक रखती है। दोनों ने आठ महीने पहले घर से भागकर शादी की थी। पुलिस ने बताया कि कौशल्या के पिता ने स्थानीय कोर्ट में सरेंडर कर दिया और इस हमले में अपनी किसी भी भूमिका से इन्कार किया था।