राजनीति

केजरीवाल के बहाने खुलकर सामने आया ‘थर्ड फ्रंट’, 2019 चुनाव के लिए तेज हुई मुहिम

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में गैर भाजपा नेताओं की यह एकजुटता देखने को मिली थी। शनिवार को दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल द्वारा राज निवास में धरना दे रहे केजरीवाल से मिलने की इजाजत न देने से इन नेताओं को मोदी सरकार के खिलाफ हमले करने का एक बड़ा मौका मिल गया है ।

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नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के विरुद्ध लामबंद हो रहे तीसरे मोर्चे के नेताओं को एक बार फिर से अपनी एकजुटता दिखाने का मौका मिल गया है। पिछले 6 दिन से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के चल रहे धरने पर चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने खुला समर्थन दिया है। अब इन नेताओं की रणनीति नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी को घरने की है। तीसरे मोर्चे के लिए एक ठोस जमीन की तलाश में जुटे इन नेताओं को लम्बे समय से एक राजनीतिक मुद्दे की तलाश थी।अब केजरीवाल के बहाने इन नेताओं को अपनी राजनैतिक जमीन को मजबूत करने का एक मुद्दा मिल गया है।

तीसरे मोर्चे की रुपरेखा

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नीति आयोग की बैठक में शिरकत करने के लिए एक दिन पहले दिल्ली आए चार राज्यों के गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों ने केजरीवाल के समर्थन में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू एक साथ केजरीवाल से मिलने दिल्ली राज निवास पहुंचे लेकिन उनको मिलने की इजाजत नहीं दी गई। इससे यह चारों नेता भड़क गए। इन मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला। इन नेताओं को डीएमके नेता स्टालिन और गुजरात से पाटीदार नेता हार्दिक पटेल का भी साथ मिल गया है। पीएम मोदी के खिलाफ ये तीसरा मोर्चा कितनी मजबूती से खड़ा हो पाएगा, ये अगले साल होने वाले आम चुनाव में पता चल जाएगा।

कर्नाटक चुनाव के बाद दूसरा मौका

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में गैर भाजपा नेताओं की यह एकजुटता देखने को मिली थी। शनिवार को दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल द्वारा राज निवास में धरना दे रहे केजरीवाल से मिलने की इजाजत न देने से इन नेताओं को मोदी सरकार के खिलाफ हमले करने का एक बड़ा मौका मिल गया है ।

केजरीवाल की आड़ में मोदी पर निशाना

केजरीवाल के बहाने जिन दलों ने पीएम मोदी पर हमले तेज किए हैं उनमें तृणमूल कांग्रेस, तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल सेक्युलर, माकपा, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख हैं।

क्या दबाव में है मोदी सरकार

केजरीवाल समेत पांच मुख्यमंत्रियों के एकजुट होकर मोर्चा खोलने से उप राज्यपाल और मोदी सरकार पर दबाव बढ़ गया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव और उप चुनावों में विपक्षी दलों की एक जुटता ने मोदी सरकार को पहले ही हलकान कर रखा है। बता दें कि लोकसभा चुनाव में बमुश्किल एक साल का वक्त बचा है। ऐसे में सभी मोर्चों से हो रहे हमलों और विपक्ष की एकजुटता से भाजपा और पीएम मोदी दबाव में हैं और इसी का नतीजा था कि सूरजकुंड में आयोजित भाजपा और संघ की चिंतन बैठक के बाद भोज में पीएम मोदी वह आत्मविश्ववास नहीं दिखा पाए जिसके लिए वह जाने जाते हैं।

दिल्ली में संवैधानिक संकट का आरोप

ममता बनर्जी ने शनिव्वर को कहा कि दिल्ली में संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एलजी ने मिलने का वक्त नहीं दिया है । उन्होंने आरोप लगाया कि एलजी के रवैये से चार महीने से दिल्ली में कोई काम नहीं हुआ है। उन्होंने भाजपा के शासन काल में चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारों को परेशान करने का आरोप लगाया। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सामने साफ संकेत दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव में विपक्ष संयुक्त रूप से पीएम को घेरेगा।

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Published on:
17 Jun 2018 09:47 am
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