
FCRA Bill का विपक्ष कर रहा विरोध (Photo-IANS)
FCRA Amendment Bill: संसद के मानसून सत्र को खत्म होने में महज अब दो दिन ही बाकी हैं। इस बार पूरा सत्र करीब हंगामेदार रहा। राज्य सभा और लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर टकराव देखने को मिला। वहीं विपक्ष में अब एफसीआरएल संशोधन बिल पर एक राय नहीं बन पा रही है। कांग्रेस इसे वापस लेने की मांग कर रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे जेपीसी के पास भेजने की बात कह रही है।
बता दें कि संसद में गतिरोध का एक अन्य बड़ा कारण FCRA में प्रस्तावित संशोधन भी है। यह कानून विदेशी स्रोतों से मिलने वाले फंड और संगठनों के विदेशी योगदान को नियंत्रित करता है।
सरकार ने इस मुद्दे पर भी विपक्ष को रियायत देने का संकेत दिया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों से कहा है कि सरकार FCRA संशोधन विधेयक को जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने को तैयार है।
सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से विपक्ष के साथ सहमति बनाने में मदद मिलेगी और महिला आरक्षण विधेयक तथा लोकसभा सीटों के परिसीमन जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सकता है।
हालांकि, FCRA बिल को लेकर विपक्ष एकजुट नहीं है। दरअसल, प्रस्तावित विधेयक में एक ऐसी नामित अथॉरिटी बनाने का प्रावधान है, जो उन संगठनों के विदेशी योगदान और संपत्तियों की निगरानी करेगी, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो चुका है।
विपक्ष का आरोप है कि इससे सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है और गैर-लाभकारी संस्थाओं के कामकाज में बाधा आ सकती है। कांग्रेस ने FCRA बिल को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है, जबकि अन्य विपक्षी दलों का रुख अलग-अलग है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शुरुआत में विधेयक को JPC के पास भेजने की मांग की थी, लेकिन बाद में उसने भी विधेयक को वापस लेने की मांग कर दी।
वहीं एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके का इस बिल पर कहना है कि विधेयक को या ता वापस लिया जाए या फिर इसे जेपीसी के पास भेजा जाए। इसके अलावा बीजेडी ने बिल को जेपीसी के पास भेजने की बात कही है।
Updated on:
11 Aug 2026 04:56 pm
Published on:
11 Aug 2026 04:56 pm
