
लोकसभा (फोटो-X/@LokSabhaSectt)
FCRA Amendment Bill Controversy: केंद्र सरकार के विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026) को लेकर विपक्ष ने विरोध की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि सरकार इस विधेयक को अगले सप्ताह पेश कर सकती है। वहीं विपक्ष इस विधेयक का विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन से सरकार को उन संस्थाओं की विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण मिल जाएगा, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द, समाप्त या निष्क्रिय हो जाता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि विपक्ष FCRA संशोधन विधेयक का विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला सोमवार को फ्लोर लीडर्स की बैठक के बाद लिया जाएगा। इसके अलावा कांग्रेस ने FCRA विधेयक समेत महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में मोदी सरकार को घेरने की तैयार कर ली।
इसी बीच पार्टी ने अपने लोकसभा और राज्य सभा सांसदों को व्हिप जारी किया है। पार्टी ने अपने सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने को कहा है।
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 भारत में व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे और विदेशी योगदान को नियंत्रित करता है। प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 में ऐसे संगठनों के विदेशी फंड और उन फंड से बनाई गई संपत्तियों को लेकर नया प्रावधान किया गया है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, संस्था अपना पंजीकरण सरेंडर कर देती है या उसका पंजीकरण समाप्त हो जाता है।
FCRA संशोधन विधेयक में मुख्य तौर पर धारा 14B, 16A और 16B को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों ने सवाल उठाए हैं।
धारा 14B में यह निर्धारित किया गया है कि किन परिस्थितियों में किसी संस्था का FCRA प्रमाणपत्र यानी समाप्त माना जाएगा। यदि कोई संस्था अपने FCRA पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करती, उसका नवीनीकरण आवेदन खारिज हो जाता है या प्रमाण पत्र की अवधि समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण नहीं होता, तो उसका FCRA प्रमाण पत्र समाप्त माना जा सकता है।
धारा 16A को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस संस्था का FCRA प्रमाण पत्र समाप्त हो गया है, उसके पास मौजूद विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियां नामित प्राधिकरण में निहित हो सकती हैं। विपक्ष और आलोचकों को आशंका है कि इससे ऐसी संस्थाओं की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है।
धारा 16B के तहत प्रस्तावित व्यवस्था को पहले के कानून के तहत पहले से निहित संपत्तियों पर भी लागू करने की बात कही गई है। यही प्रावधान उन संस्थाओं के लिए चिंता का विषय है जिनका FCRA पंजीकरण कई साल पहले समाप्त हो चुका है, लेकिन वे वर्तमान में घरेलू स्रोतों से मिलने वाले फंड के जरिए काम कर रही हैं।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रस्तावित विधेयक को पूरी तरह असंवैधानिक बताया है। उनका आरोप है कि इससे एनजीओ, सामुदायिक संगठनों और सामाजिक सेवा संस्थाओं पर सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है।
वेणुगोपाल ने विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित संगठनों को लेकर चिंता जताई और कहा कि प्रस्तावित कानून स्वैच्छिक एवं सामाजिक सेवा संस्थाओं पर दबाव बढ़ा सकता है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी विधेयक को कठोर बताया है। उन्होंने इसको लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है। टीएमसी सांसद के मुताबिक, प्रस्तावित कानून से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले NGOs तथा अन्य संस्थाओं पर अत्यधिक कार्यपालिका नियंत्रण स्थापित हो सकता है।
Updated on:
09 Aug 2026 03:43 pm
Published on:
09 Aug 2026 03:43 pm
