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2019 में मार्गदर्शक मंडल भेजे जा सकते हैं सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह: यशवंत सिन्हा

यशवंत सिन्हा ने कहा कि बीजेपी के पास एक प्रसिद्ध मार्गदर्शक मंडल है, जिसमें अभी बहुत वेकैंसी है क्योंकि वहां संख्या निर्धारित नहीं हैा 2019 चुनाव के बाद बहुत से नेता वहां भेजे जा सकते हैं।

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Jul 10, 2018
2019 में मार्गदर्शक मंडल भेजे जा सकते हैं सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह: यशवंत सिन्हा

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव में अगर भारतीय जनता पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े को छूने में कामयाब हो जाती है, तो बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेजा जा सकता है। यह कहना है कि बीजेपी छोड़ चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का। उन्होंने कहा कि वैसे तो बीजेपी 2014 लोकसभा चुनाव की तरह ऐसिहासिक जीत हासिल नहीं कर पाएगी लेकिन अगर ऐसा संयोग बनाता है तो, पार्टी कितने लोगों को मार्गदर्शक मंडल का रास्ता दिखाएगी ये कहना अभी मुश्किल है।

मार्गदर्शक मंडल भेजे जाएंगे सुषमा और राजनाथ !

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एक वेबसाइट से बात करते हुए सिन्हा ने कहा कि बीजेपी के पास एक प्रसिद्ध मार्गदर्शक मंडल है, जिसमें अभी बहुत वेकैंसी है क्योंकि वहां संख्या निर्धारित नहीं हैा यशवंत सिन्हा ने कहा कि अगर बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनाव में बहुमत मिलता है तो वर्तमान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृहमंत्री राजनाथ सिंह जैसे तेजतर्रार नेताओं को भी मार्गदर्शक मंडल भेजा जा सकता है।

संघ भी मौजूदा सांसदों को खिलाफ

8 जुलाई को मीडिया में आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि सुमित्रा महाजन और उमा भारती समेत करीब 50 वर्तमान सांसदों को आगामी लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया जाएगा, लेकिन इस लिस्ट राजनाथ और सुषमा के नाम का जिक्र है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिली है। खबर है कि नामों को फाइनल करने के लिए खुद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने संगठन और संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की है। इस सूची में अधिकांश सांसद यूपी से ही हैं। जानकारी के मुताबिक खुद आरएसएस भी मौजूदा सांसदों के खिलाफ है और एक रिपोर्ट बनाकर संघ प्रमुख मोहन भागवत के पास भी जा चुकी है।

यूपी के करीब 50 सासंदों का कट सकता है टिकट

बताया गया कि बीजेपी अध्यक्ष ने यूपी दौरे के वक्त विस्तारकों के साथ अहम बैठक भी की थी। इस दौरान विस्तारकों ने एक रिपोर्ट अमित शाह को सौंपी। जिसमें यूपी के 35 से लेकर 50 सांसदों के कामों का लेखा-जोखा था। रिपोर्ट में बताया गया है कि चार साल के कार्यकाल के दौरान यह सांसद जनता के पास नहीं गए। पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की योजनाओं की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंचाई। सांसद निधि से जितने भी काम कराए, वह जमीन पर नहीं है। जनता इन सांसदों से असंतुष्ट है और अगर इन्हें टिकट दोबारा दिया जाएगा तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी के बाद अमित शाह ने नए चेहरों की खोज के लिए संगठन को जिम्मेदारी दी है।

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Published on:
10 Jul 2018 04:34 pm
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