प्रतापगढ़

Pratapgarh: 12वीं के छात्र की हत्या के बाद फूटा गुस्सा, आरोपियों के घरों में लगाई आग, भारी पुलिस बल तैनात

Pratapgarh Violence: राजस्थान में प्रतापगढ़ जिले के धरियावद उपखंड के पाटला बावड़ी गांव में मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया, जिसमें 12वीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र नाथूलाल मीणा पुत्र भीखाराम मीणा निवासी पाटला बावड़ी की चाकूबाजी में मौत हो गई।

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आरोपियों के घरों में लगाई गई आग को बुझाती पुलिस। फोटो: पत्रिका

प्रतापगढ़। राजस्थान में प्रतापगढ़ जिले के धरियावद उपखंड के पाटला बावड़ी गांव में मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया, जिसमें 12वीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र नाथूलाल मीणा पुत्र भीखाराम मीणा निवासी पाटला बावड़ी की चाकूबाजी में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार पारसोला थाना क्षेत्र के पाटला बावड़ी गांव में गांव में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान देर रात कहासुनी शुरू हुई, जो बाद में गंभीर झगड़े में बदल गई।

बताया जा रहा है कि विवाद के बाद जब नाथूलाल अपने घर लौट रहा था, तभी पाटला बावड़ी मोड़ पर पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उसे घेर लिया और उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

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घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल

घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल बन गया और आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपियों के घरों में आग लगा दी। जिसके कई घर पूरी तरह जलकर राख हो गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस प्रशासन हरकत में आया और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सोमवार को गांव में शांति है। लेकिन, ग्रामीणों में भय का माहौल है।

मुख्य आरोपी सहित 5-6 संदिग्ध डिटेन

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सहित 5-6 संदिग्धों को डिटेन कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य भी मौके पर पहुंचे। फिलहाल गांव में शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

बांसवाड़ा में भी ऐसा ही मामला आया था सामने

बता दे कि पिछले महीने बांसवाड़ा जिले के टामटिया गांव में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। कुछ लोगों ने घर में घुसकर गोविंद पर धारदार हथियार से हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने हालात अपने हाथ में ले लिए थे। गांव में तनाव इस कदर बढ़ गया था कि पुलिस और फायर ब्रिगेड को अंदर तक घुसने नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने डामर सड़क पर पत्थर और लकड़ियां डालकर रास्ता बंद कर दिया गया था और पुलिस पर भी जमकर पथराव किया था।

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