प्रतापगढ़

Pratapgarh: सड़क हादसे में मौत, अब तक कार्रवाई नहीं, गुस्साए ग्रामीणों ने NH56 पर ट्रकों को रोका, पुलिस पर आरोप

Pratapgarh News: एक माह पुराने सड़क हादसे में कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों और परिजनों ने मंगलवार को सुहागपुरा थाने के सामने धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने एनएच-56 पर माइंस से आने वाले ट्रकों को भी रोक दिया।

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ग्रामीणों से समझाइश करती पुलिस। फोटो- पत्रिका

प्रतापगढ़। जिले के सुहागपुरा थाना क्षेत्र में मंगलवार को ग्रामीणों, परिजनों और भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं का आक्रोश उस समय फूट पड़ा, जब एक माह पुराने सड़क हादसे में अब तक कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने एनएच-56 पर माइंस से आने वाले ट्रकों को रोक दिया। सुहागपुरा थाने के सामने बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। मौके पर कई थानों का पुलिस जाब्ता तैनात किया गया।

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प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रतापगढ़ प्रशासन ने हादसे में शामिल ट्रेलर का पता लगाने के लिए 20 दिन का समय मांगा था, लेकिन तय अवधि पूरी होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आंदोलनकारियों ने पुलिस पर मामले में लापरवाही बरतने और आंदोलनकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने के भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों की ओर से आंदोलन समाप्त करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे में शामिल वाहन और उसके मालिकों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

शंकरलाल की मौके पर ही मौत

दरअसल 11 मई को एनएच-56 पर सुहागपुरा और छायन के बीच दाता माइंस क्षेत्र में चलने वाले एक ट्रेलर की चपेट में आने से मोटादामा निवासी शंकरलाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के बाद 12 मई को परिजनों ने सुहागपुरा थाने में मामला दर्ज करवाया था। पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के बाद जब परिजन जांच की प्रगति जानने थाने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि हादसे में शामिल वाहन का पता नहीं चल पाया है। इसके बाद परिजनों ने भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा से सहायता मांगी।

ज्ञापन सौंपकर सात सूत्रीय मांगें रखीं

संगठन ने 15 मई को एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर सात सूत्रीय मांगें रखीं। इनमें हादसे में शामिल ट्रेलर और चालक की पहचान कर कार्रवाई, मृतक परिवार को आर्थिक सहायता, ओवरलोड और तेज रफ्तार ट्रकों पर नियंत्रण तथा पूरे मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग शामिल थी। मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू किया गया था। इसी दौरान भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक और प्रतापगढ़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक प्रत्याशी मांगीलाल ननामा भी आंदोलन में शामिल हुए और 25 मई को आमरण अनशन पर बैठ गए।

20 दिन का समय मांगा गया

बाद में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता हुई, जिसमें प्रशासन की ओर से हादसे में शामिल वाहन का पता लगाने के लिए 20 दिन का समय मांगा गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दिया गया समय पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक वाहन और चालक का पता नहीं लगाया जा सका है। मृतक शंकरलाल परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और पांच बच्चे हैं। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि जब तक हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

Published on:
16 Jun 2026 07:18 pm