
प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ शहर में धार्मिक स्थल के समीप गाय के बछड़े का सिर मिलने की घटना को लेकर जनआक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। 13 जून को शहर के नई आबादी में गाय के बछड़े का सिर मिला था। मामले में दो दिन बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज हिंदू समाज और विभिन्न संगठनों के आह्वान पर सोमवार को प्रतापगढ़ शहर बंद रहा।
सुबह से ही प्रतापगढ़ शहर के प्रमुख बाजार, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और कई व्यापारिक संस्थान स्वेच्छा से बंद नजर आए। शहर में बंद का व्यापक असर देखने को मिला और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता घटना के विरोध में प्रदर्शन करते रहे। घटना के विरोध में रविवार को नगर परिषद परिसर में हिंदू समाज की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सर्वसम्मति से शहर बंद का निर्णय लिया गया था। इसके बाद युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बाजारों में पहुंचकर व्यापारियों से बंद को सफल बनाने की अपील की थी। सोमवार सुबह से ही शहर में बंद का असर दिखाई देने लगा और अधिकांश बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा।
हिंदू समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि धार्मिक स्थल के समीप इस प्रकार की घटना से लोगों की धार्मिक भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। समाज के लोगों ने प्रशासन से मामले का शीघ्र खुलासा कर दोषियों को गिरफ्तार करने तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस को पहले ही 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
बंद और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए शहर में पुलिस एवं प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी रखी गई। पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। वहीं शहरवासियों की निगाहें अब पुलिस की आगामी कार्रवाई और मामले के खुलासे पर टिकी हुई हैं।
इससे पहले प्रदर्शनकारियों पुलिस को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। साथ ही सूरजपाल चौराहे पहुंचकर गांधी मूर्ति के सामने धरना दिया था। इस दौरान हनुमान चालीसा का पाठ किया और मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की थी। स्थिति को देखते हुए पुलिस उपाधीक्षक गजेंद्र सिंह राव और उपखंड अधिकारी अश्विन मालु मौके पर पहुंचे थे। जिन्होंने जल्द ही कार्रवाई का आश्वासन दिया था। लेकिन, अभी तक दोषी नहीं पकड़ने जाने से आक्रोश व्याप्त है।