प्रतापगढ़

अनुशासन पैदा करता है रोजा

अनुशासन पैदा करता है रोजा
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pratapgarh
अनुशासन पैदा करता है रोजा

प्रतापगढ़. रोजे का इंसान के दिमाग और उसके शरीर दोनों पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। रोजा एक वार्षिक ट्रेनिंग कोर्स है। जिसका उद्देश्य इंसान की ऐसी विशेष ट्रेनिंग करना है। जिसके बाद वह सालभर स्वयं केन्द्रित जीवन के बजाए ईश्वर केन्द्रित जीवन व्यतीत कर सके। रोजा इंसान में अनुशासन पैदा करता है ताकि इंसान अपनी सोच व कामों को सही दिशा दे सके। रोजा इंसान का स्वयं पर नियंत्रण ठीक करता है। इंसान के अन्दर ग़ुस्सा, ख्वाहिश, इच्छा, लालच, भूख और दूसरी भावनाएं हैं। इनके साथ इंसान का दो में से एक ही रिश्ता हो सकता है। इंसान इन्हें कन्ट्रोल करे या ये इंसान को कन्ट्रोल करें। पहली सूरत में लाभ और दूसरी में हानि है। रोजा इंसान को इन्हें काबू करना सिखाता है। अर्थात इंसान को जुर्म और पाप से बचा लेता है।

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तीसरे जुम्मे की नमाज अदा की
रमजानुल मुबारक माह का तीसरे शुक्रवार (जुम्मा) की नमाज शहर की लोहार गली स्थित जुम्मा मस्जिद, पीर बाग मस्जिद, मोहम्मदिया रोड स्थित मोहम्मदिया मस्जिद, वाटर वक्र्स रोड स्थित मदीना मस्जिद, मस्जिदे बिलाल, उस्तादजी की बावड़ी, सालमपुरा रोड स्थित बड़ी मस्जिद में अदा की गई। जिसमें शहर समेत आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग इसमें शामिल हुए। इस दौरान इमामों ने नमाज से पूर्व तकरीर बयान करते हुए रोजे नमाज, और जकात की अहमियत बयान की। पीरबाग मस्जिद में शहर काजी हाफीज जाफर शेख ने रमजानुल मुबारक की अहमियत बयान करते हुए कहा कि यह पाक महीना सभी महीनों से आला व अफजल है। इसका अहतराम करना हर मोमिन का फर्ज है। इस माह जितना ज्यादा हो सके रोजे नमाज के साथ जकात आदि निकालना चाहिए।
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झांतला सिंचाई परियोजना लाएगी खुशहाली
झांतला सिंचाईपरियोजना को अमलीजामा
26 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर लगी मुहर
तकनीकी स्वीकृति जारी, इसी माह खुलेंगे टेंडर
कई वर्षों से लम्बित थी परियोजना
प्रतापगढ़ जिले के खोरिया ग्राम पंचायत के पास पहाडिय़ों के बीच झांतला क्षेत्र में सिंचाई परियोजना को आखिरकार अमलीजामा पहनाया जा चुका है।इस बांध की 26 करोड़ रुपए तकनीकी स्वीकृति जारी होने के बाद टेंडर भी हो चुके है। जो इसी माह खोले जाने है।इसके बाद यहां कार्य शुरू हो सकेगा।
गौरतलब है कि झांतला बांध काफी पुराना था। जो मिट्टी का कई वर्षों में टुकड़ों में बनाया था।इसमें ऊंचाई भी बढ़ाई जाती रही। इसके एक साइड में ओवरफ्लो भी बनाया गया।जो अलग-अलग समय में हुआ था। देखरेख के अभाव में यह बांध जीर्ण-शीर्ण हो चुका था।जनप्रतिनिधियों की मांग को देखते हुए जल संसाधन विभाग की ओर से इसके लिए प्रस्ताव बनाए गए।
इसके लिए इसके 250 मीटर आगे बांध का प्रस्ताव बनाया गया। यह बांध उद्गम स्थल पर प्रस्तावित होने से इस जल का काफी उपयोग होना सामने आया।

डेढ़ सौ हैक्टेयर में सिंचाई, बढ़ेगा भू-जल स्तर
प्रस्तावित बांध का स्थान भू-जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र डार्क जोन में स्थित है। इसकी उपयोगी भराव क्षमता 65 एमसीएफटी होगी। जिससे प्रतापगढ़ तहसील के झांतला, उमरीखेड़ा, दलेलपुरा, उम्मेदपुरा, अम्बाखो व केशरपुरा ग्रामों की 147 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्र का वाटर लेवल ऊंचा होगा। इससे लगभग 300 परिवार लाभान्वित होंगे।
यह रहेगा तकमीना
यह परियोजना चम्बल बैसिन में गांधी सागर बांध के जल ग्रहण क्षेत्र में आती है। यहां प्रस्तावित बांध मध्यप्रदेश के गांधी सागर बांध की कुल भराव क्षमता का 0.017 प्रतिशत ही है।इस प्रस्तावित बांध का केचमेंट क्षेत्र 8 .10 वर्ग किमी है। जिसकी 50 प्रतिशत डिपेंडेबिलिटी की गणना अनुसार कुल भराव 65 एमसीएफटी आती है। इसका भराव मात्र 44 एमसीएफटी ही होने से गांधी सागर बांध में कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।

निविदाएं जारी, इसी माह से होगा कार्य
झांतला बांध के लिए 26 करोड़ रुपए का स्वीकृति हुई थी। इसके लिए निविदाएं जारी की गई।जिसकी तकनीकी बिड़ 18 जून को खोली जाएगी।इसके साथ ही डूब में आने वाली भूमि के लिए मुआवजे की कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
जितेन्द्र मेनारिया
अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग, प्रतापगढ़