प्रयागराज

High Court News: नक्शा पास कराने के लिए PDA को नहीं देना होगा बेटरमेंट चार्ज, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लगाई रोक

प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) से जुड़े एक मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने याची की अपील पर PDA द्वारा नक्शा पास कराने के लिए बेटरमेंट चार्ज वसूलने पर रोक लगा दी है।

2 min read
इलाहाबाद हाई कोर्ट (Image: IANS)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) द्वारा नक्शा पास कराने के लिए बेटरमेंट चार्ज (Betterment Charge) वसूलने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नक्शा स्वीकृति के लिए बेटरमेंट चार्ज जमा करने की कोई जरूरत नहीं है। अन्य सभी वैध शुल्क जमा करने पर PDA को कानून के अनुसार प्लान स्वीकृत करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने प्रतीक सिंह की याचिका पर दिया है।

ये भी पढ़ें

लखनऊ मेट्रो का 150 KM तक होगा विस्तार; बाराबंकी और PGI तक पहुंचेगी सेवा, योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रोजेक्ट पर लगाई मुहर

हाई कोर्ट ने याची के पक्ष में दिया फैसला

हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान याचिका की पैरवी अधिवक्ता सुनील दत्त कौटिल्य ने की। याची प्रतीक सिंह ने मांग की थी कि PDA को निर्देश दिया जाए कि डिमांड नोट में बेटरमेंट चार्ज को छोड़कर बाकी राशि लेकर उनका नक्शा पास कर दिया जाए। कोर्ट ने याची को राहत देते हुए कहा कि वह बेटरमेंट चार्ज को छोड़कर अन्य शुल्क जमा करेगा। इसके बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण कानून के मुताबिक जांच कर प्लान स्वीकृत करेगा। कोर्ट ने इस मामले को विचारणीय मानते हुए PDA और राज्य सरकार समेत अन्य विपक्षियों को जवाब दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया है।

अधिवक्ता ने कानूनी दलीलें और SC का हवाला दिया

केस की सुनवाई के दौरान फरियादी के अधिवक्ता एसडी कौटिल्य ने कोर्ट को बताया कि उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 35 के तहत बेटरमेंट चार्ज तभी वसूला जा सकता है, जब मौके पर विकास प्राधिकरण द्वारा कोई विकास कार्य या सुधार किया गया हो। प्रारंभिक स्तर पर, जब कोई विकास कार्य नहीं हुआ है तो धारा 15(2-ए) के तहत भी यह शुल्क नहीं लिया जा सकता है।

वकील ने सुप्रीम कोर्ट के मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण बनाम राजेश शर्मा मामले का हवाला दिया। इस मामले में शीर्ष अदालत ने इस मामले में साफ किया था कि राज्य सरकार विकास प्राधिकरणों को अधिनियम में निर्धारित शुल्कों (धारा 15(2-ए)) के अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं दे सकती है। कोर्ट ने अपने आदेश में दोहराया कि ले-आउट प्लान मंजूरी पर निरीक्षण शुल्क, पर्यवेक्षण शुल्क, उप-विभाजन शुल्क, इम्पैक्ट फीस आदि वसूलना संविधान के अनुच्छेद 265 के विरुद्ध है। कानून में जिसका प्रावधान नहीं है, उसे टैक्स या फीस के रूप में नहीं लिया जा सकता।

ये भी पढ़ें

UPSSSC ने 722 पदों पर निकाली भर्ती, 4 जून से शुरू होंगे आवेदन, यहां देखें पूरी डिटेल
Updated on:
25 May 2026 03:33 pm
Published on:
25 May 2026 03:27 pm
Also Read
View All
आज की चेतावनी: पूर्वी यूपी के 10 जिलों के लिए रेड, पश्चिमी पश्चिमी यूपी के 22 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट

प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद बोले- उनका ट्विटर हैंडल ब्लॉक, कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर भी दिया बयान

‘आज के जमाने में असलहा लेकर चलता कौन है?’, हाईकोर्ट के शस्त्र लाइसेंस का ब्योरा मांगने वाले सवाल पर क्या बोले बृजभूषण सिंह?

राजा भैया, धनंजय सिंह, और बृजभूषण सिंह के लाइसेंसी शस्त्रों की जांच के आदेश तो कोर्ट ने दे दिए, अब दागियों से छीने जाएंगे असलहे!

सपा सांसद के भाई के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, गाजीपुर डीएम को अवमानना नोटिस