प्रयागराज

High Court News: नक्शा पास कराने के लिए PDA को नहीं देना होगा बेटरमेंट चार्ज, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लगाई रोक

प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) से जुड़े एक मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने याची की अपील पर PDA द्वारा नक्शा पास कराने के लिए बेटरमेंट चार्ज वसूलने पर रोक लगा दी है।
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Allahabad High Court
इलाहाबाद हाई कोर्ट (Image: IANS)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) द्वारा नक्शा पास कराने के लिए बेटरमेंट चार्ज (Betterment Charge) वसूलने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नक्शा स्वीकृति के लिए बेटरमेंट चार्ज जमा करने की कोई जरूरत नहीं है। अन्य सभी वैध शुल्क जमा करने पर PDA को कानून के अनुसार प्लान स्वीकृत करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने प्रतीक सिंह की याचिका पर दिया है।

हाई कोर्ट ने याची के पक्ष में दिया फैसला

हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान याचिका की पैरवी अधिवक्ता सुनील दत्त कौटिल्य ने की। याची प्रतीक सिंह ने मांग की थी कि PDA को निर्देश दिया जाए कि डिमांड नोट में बेटरमेंट चार्ज को छोड़कर बाकी राशि लेकर उनका नक्शा पास कर दिया जाए। कोर्ट ने याची को राहत देते हुए कहा कि वह बेटरमेंट चार्ज को छोड़कर अन्य शुल्क जमा करेगा। इसके बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण कानून के मुताबिक जांच कर प्लान स्वीकृत करेगा। कोर्ट ने इस मामले को विचारणीय मानते हुए PDA और राज्य सरकार समेत अन्य विपक्षियों को जवाब दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया है।

अधिवक्ता ने कानूनी दलीलें और SC का हवाला दिया

केस की सुनवाई के दौरान फरियादी के अधिवक्ता एसडी कौटिल्य ने कोर्ट को बताया कि उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 35 के तहत बेटरमेंट चार्ज तभी वसूला जा सकता है, जब मौके पर विकास प्राधिकरण द्वारा कोई विकास कार्य या सुधार किया गया हो। प्रारंभिक स्तर पर, जब कोई विकास कार्य नहीं हुआ है तो धारा 15(2-ए) के तहत भी यह शुल्क नहीं लिया जा सकता है।

वकील ने सुप्रीम कोर्ट के मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण बनाम राजेश शर्मा मामले का हवाला दिया। इस मामले में शीर्ष अदालत ने इस मामले में साफ किया था कि राज्य सरकार विकास प्राधिकरणों को अधिनियम में निर्धारित शुल्कों (धारा 15(2-ए)) के अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं दे सकती है। कोर्ट ने अपने आदेश में दोहराया कि ले-आउट प्लान मंजूरी पर निरीक्षण शुल्क, पर्यवेक्षण शुल्क, उप-विभाजन शुल्क, इम्पैक्ट फीस आदि वसूलना संविधान के अनुच्छेद 265 के विरुद्ध है। कानून में जिसका प्रावधान नहीं है, उसे टैक्स या फीस के रूप में नहीं लिया जा सकता।

Updated on:
25 May 2026 03:33 pm
Published on:
25 May 2026 03:27 pm