- प्रदेश में फर्जी, बोगस बिजली बिल तैयार कर वसूली में गिरफ्तारी व उत्पीड़न एक चलन -हाईकोर्ट - कोर्ट ने प्रमुख सचिव व एमडी से पूछा फर्जी बोगस बिल बनाना दंडनीय अपराध तो क्या की कार्रवाई कोर्ट ने कहा कि फर्जी बिजली बिल लेजर एकाउंट तैयार करना भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। यह कृत्य फर्जी बिल वसूली में लोगों को बर्बाद करने की कोशिश है। उपभोक्ताओं के मूल अधिकारों का हनन किया जा रहा है।इसकी जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों द्वारा फर्जी और अवैध बिजली बिल जारी कर वसूली में गिरफ्तारी करने व उपभोक्ताओं परेशान करने का चलन बना गया है। यह महाप्रबंधकों व सरकार की जानकारी में किया जा रहा है। जिसे दोनों ने हलफनामा दायर कर स्वीकार किया है कि उनके अधिकारी व कर्मचारी कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। किन्तु ऐसे अधिकारियों पर विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि फर्जी बिजली बिल लेजर एकाउंट तैयार करना भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। यह कृत्य फर्जी बिल वसूली में लोगों को बर्बाद करने की कोशिश है। उपभोक्ताओं के मूल अधिकारों का हनन किया जा रहा है।इसकी जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोर्ट ने बिजली विभाग के प्रमुख सचिव व सभी विद्युत वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और पूछा है कि क्या फर्जी बोकस बिजली बिल तैयार कर वसूली में उत्पीड़न करना आपराधिक कृत्य व दंडनीय अपराध नहीं है। यदि है तो विद्युत निगमों के अधिकारियों कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की गई। क्या फर्जी बिल तैयार कर वसूली उत्पीड़न उपभोक्ता के मूल अधिकारों का हनन नहीं है। क्या सरकार व अधिकारी पर नागरिकों के मूल अधिकारों के संरक्षण का दायित्व नहीं है।इस संबंध में क्या सरकार ठोस कदम उठायेगी।
कोर्ट ने पूछा है कि क्या सरकार उपभोक्ता लेजर , रिकॉर्ड की आडिट करवायेगी।ताकि फर्जी, बोगस बिजली बिल का पता लग सके। कोर्ट ने मनमानी बिजली बिल वसूली पर लगी रोक जारी रखा है और कहा है कि नियमित बिल भुगतान जारी रखा जाय। कोर्ट ने प्रमुख सचिव व प्रबंध निदेशकों कोमांगी गई जानकारी के साथ 14मार्च तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने पुत्तन व दो अन्य याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण खण्ड मिलख रामपुर ने याची का विद्युत कनेक्शन काटे जाने के बाद 32लाख रूपये का फर्जी बोगस बिल जारी किया।जब कोर्ट ने कड़ाई की तो साढ़े तीन लाख का सही बिल जारी किया गया।
कोर्ट ने सरकार व प्रबंध निदेशक से हलफनामा मांगा तो उन्होंने ने विभाग की गलती स्वीकार की। किन्तु उपभोक्ताओं के उत्पीड़न करने वाले अधिकारियों पर हुई कार्रवाई व उपभोक्ताओं को परेशान किए जाने पर रोक के कदम की जानकारी नहीं दी।इसपर कोर्ट ने दोनों शीर्ष अधिकारियों से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। सुनवाई 14मार्च को होगी।