प्रयागराज

सरकार को है अपराधी के आवास के विध्वंस का अधिकार? बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का….

Allahabad High Court News: क्या सरकार को अपराधी के आवास के विध्वंस का अधिकार है? बुलडोजर कार्रवाई को लेकर जानिए, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या सवाल उठाए हैं?

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High Court प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में किसी भी अपराध के बाद बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दे कोर्ट ने सवाल पूछे हैं। हमीरपुर निवासी फहीमुद्दीन और 2 अन्य को अंतरिम राहत देते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की खंडपीठ ने सवाल उठाया, '' क्या अपराधी के आवास को राज्य को विध्वंस करने का अधिकार है अथवा उसे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए?

अपराध के बाद तुरंत विध्वंस करना क्या कार्यपालक विवेक का विकृत प्रयोग है और विध्वंस की उचित आशंका ही लोगों के पास अदालत जाने का आधार हो सकती है। क्या इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के दिशा-निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है?''

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UP Hindi News: मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को

राज्य सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि कोई विध्वंस, कानूनी प्रक्रिया का पालन किए और याचीगण को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना नहीं किया जाएगा। मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

Uttar Pradesh Hindi News: आपस में पुत्र, पिता और माता हैं याचीगण

दरअसल, सुमेरपुर थाने में भरुआ सुमेरपुर में वार्ड 11 थोकचंद निवासी याचीगण के रिश्तेदार अफान के खिलाफ पाक्सो एक्ट की धारा 3/4 और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) के तहत मामला दर्ज है। उनका मकान भीड़ ने घेर लिया था। प्रतिवादियों ने तीसरी याची जैबुन निशा के नाम पंजीकृत इंडियन लॉज सील कर दिया है। जिलाधिकारी के आदेश से 11 फरवरी 2025 को याची (क्रमांक 2) मोइनुद्दीन के नाम आरा मशीन सील की गई है। आपस में क्रमशः पुत्र, पिता और माता याचीगण हैं। आरोपी अफान रिश्ते में फहीमुद्दीन का चचेरा भाई और अन्य दोनों का भतीजा है।

Prayagraj News in Hindi: कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई विध्वंस नहीं

याचीगण ने उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए जा सकने की आशंका जताई है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने याचिका पर यह कहते हुए प्रारंभिक आपत्ति उठाई कि यह प्री-मेच्योर है। केवल नोटिस याचीगण को जारी की गई है, जिसका उन्हें जवाब देना है। लॉज और आवास को सील नहीं किया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई विध्वंस नहीं किया जाएगा।

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