Raja Bhaiya Dhananjay Singh Brajbhushan Singh Latest News: राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजभूषण सिंह के लाइसेंसी शस्त्रों की जांच के आदेश तो कोर्ट ने दे दिए हैं। पढ़िए केस में क्या नया अपडेट है?
Raja Bhaiya Dhananjay Singh Brajbhushan Singh Latest News: उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों और प्रभावशाली लोगों के लाइसेंसी हथियारों को लेकर अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। वर्षों से रसूख और राजनीतिक पहुंच के दम पर हथियार रखने वाले कई चर्चित चेहरों की फाइलें अब जांच के घेरे में आ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्टके सख्त रुख के बाद प्रशासन और गृह विभाग सक्रिय हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई दागी शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं।
हाईकोर्ट ने प्रदेश के कई बाहुबली और प्रभावशाली लोगों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंस और उन्हें मिली सरकारी सुरक्षा की विस्तृत जानकारी तलब की है। अदालत ने खासतौर पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृज भूषण शरण सिंह, विनीत सिंह समेत कई चर्चित नामों के लाइसेंसी असलहों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।
कोर्ट के आदेश के बाद गृह विभाग ने सभी जिलों से रिपोर्ट तलब कर ली है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे सभी लोगों का पूरा विवरण जुटाया जाए, जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और फिर भी उनके पास शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि जोनवार ऐसे लाइसेंस धारकों की सूची तैयार की जाए, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में इन लोगों को हथियार रखने की अनुमति दी गई थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या नियमों का पालन करते हुए लाइसेंस जारी किए गए थे या फिर प्रभाव और दबाव के चलते प्रक्रिया में ढील बरती गई।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए कि शस्त्र लाइसेंस केवल सुरक्षा के लिए होते हैं, ताकत दिखाने या दबदबा कायम करने के लिए नहीं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 26 मई को होनी है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजर टिकी हुई है।
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। इनमें छह हजार से ज्यादा ऐसे लोग शामिल हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
हालांकि साल 2018 में प्रदेश में करीब 12.50 लाख लाइसेंसी हथियार थे। बाद में नियमों में बदलाव और सत्यापन अभियान के चलते बड़ी संख्या में लाइसेंस निरस्त किए गए। कुछ समय तक नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर भी रोक लगाई गई थी।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद माना जा रहा है कि सरकार अब लाइसेंसी हथियारों के सत्यापन अभियान को और तेज कर सकती है। जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर पाया जाएगा, उनके शस्त्र लाइसेंस निरस्त होने की संभावना बढ़ गई है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि लाइसेंस का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए हो रहा था या फिर राजनीतिक और सामाजिक दबदबा बनाने के लिए।