IIT Baba in Mahakumbh 2025: महाकुंभ में IIT बाबा इंटरव्यू के दौरान फफक-फफक कर रोने लगे। इस दौरान उन्होंने अपना नया नाम भी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें IIT बाबा का टैग नहीं चाहिए।
IIT Baba: महाकुंभ 2025 में IIT बाबा के नाम से मशहूर अभय सिंह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह फूट-फूटकर रो रहे हैं। उनका कहना है कि मुझे यह पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए। आप ले लीजिए। उन्होंने बताया कि मशहूर होने से पहले वह प्रयागराज में ही थे, तब वह अपने किसी भी साथी के साथ कहीं भी बैठ जाते थे।
अभय सिंह का कहना है, “पापुलर होने के बाद मेरे मकसद को भला बुरा कहा जा रहा है। मुझे गालियों से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मेरे मकसद को लेकर जब सवाल उठते हैं तो मुझे तकलीफ होती है। मुझे IIT बाबा का टैग नहीं चाहिए। मुझसे सनातन, कुंभ और इस्लाम के मुद्दे पर बातचीत करो।”
मीडिया से बातचीत के दौरान अभय सिंह ने कहा, “महाकुंभ की मेन चीज IIT बाबा नहीं है, बल्कि यहां आने वाले गरीब लोग हैं। यहां देखना चाहिए कि कितने ऑर्गेनाइज्ड तरीके से लोग यहां मूव कर रहे हैं। गरीब लोग रोटी बांधकर लाते हैं। ठंड में रहते हैं। शुरू में मैं भी ऐसे ही रहता था। सुबह 6 बजे मैं स्नान करने आता था। लोग अलग-अलग तरीके से इश्वर से जुड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन महाकुंभ उसका एक ही तरीका है। बटेंगे तो कटेंगे।”
अभय सिंह ने कहा, “मैं जिस माया को छोड़कर आया हूं, आप वही बार-बार मेरे सामने ला रहे है। उसके आगे बाबा भी लगा दिया। ये तो मैं पहले ही नहीं चाहता था। मैं इससे इरिटेट होता हूं। मैं तो कभी ऐसे बोलता भी नहीं था। मेरी दीदी जरूर कहती थी कि ये IIT से है। मैं चाहता हूं कि बड़े-बड़े साइंटिस्ट यहां आए। अगर हमारा सनातन सत्य है, तो हम डर क्यों रहे हैं।”
अभय सिंह ने कहा, “मुझे अननोन बनकर अच्छा लगता है। नोन बनकर रहने में कोई मजा नहीं है। मुझे अलग-अलग नाम दो ना, क्यों IIT बाबा ही। मुझे कई लोगों ने कई नाम दिए। मुझे जूना अखाड़े के बाबा सोमेश्वर दास ने कहा कि मुझे तेरे अंदर शंकराचार्य दिख रहा है। पहले मुझे मसानी गोरख, बटुक भैरव जैसे नाम मिला। मेरा नाम ‘कल्कि’ है, यह नाम शिव ने दिया है।” इस दौरान बहन और दोस्तों की बात करते हुए अभय सिंह फफक-फफक कर रोने लगे।
झज्जर जिले के सासरौली गांव के रहने वाले अभय सिंह ने IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने कनाडा में दो साल तक नौकरी की। लेकिन कोरोना लॉकडाउन के दौरान वह भारत लौट आए। इसी दौरान उनका झुकाव अध्यात्म की ओर होने लगा। लगभग 11 महीने पहले अभय ने घर छोड़ दिया। छह महीने पहले उन्होंने परिवार से भी संपर्क पूरी तरह समाप्त कर लिया। इस दौरान वह काशी में भटकते रहे और अब प्रयागराज महाकुंभ में दिखाई दिए। परिवार को भी उनके बारे में सोशल मीडिया के जरिए ही जानकारी मिली।