प्रयागराज

mahakumbh stampede: महाकुंभ भगदड़ में 30 मौतों का जिम्मेदार कौन, इन तीन अधिकारियों की एक चूक ने बदला महाकुंभ का माहौल

mahakumbh stampede: प्रयागराज के महाकुंभ 2025 को दिव्य भव्य बनाने के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोडी, लेकिन मेलाधिकारी और एसएसपी मेला की चूक ने पूरे मेले का माहौल खराब कर दिया। जिसमें न सिर्फ 30 श्रध्दालुओं की जान गई बल्कि कई श्रध्दालु जख्मी हुए और देखते ही देखते पूरे महाकुंभ का रंग ही बदल गया।

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mahakumbh stampede: महाकुंभ 2025 को लेकर तैयारियां पिछले एक साल से चल रही थीं। प्रदेश की योगी सरकार ने इसे दिव्य और भव्य बनाने का पूरा इंतजाम किया था। मेला सकुशल प्रारंभ हुआ और दो स्नान चाक चैबंद व्यवस्था में सपंन्न कराए भी गए। वहीं तीसरे और सबसे प्रमुख स्नान मौनी अमावस्या के दिन मेलाधिकारी की एक चूक ने पूरे मेले का रंग ही बदल डाला। हुआ यूं कि मौनी अमावस्या के ठीक पहले मंगलवार की रात एक बजे के करीब लाखों श्रध्दालुओं की भीड़ संगम नोज पर जुटी और भगदड़ मच गई जिसमें 30 श्रध्दालुओं की जान चली गई 60 श्रध्दालु गंभीर घायल हो गए। इसके बाद प्रयागराज आने वाले दूर अन्य जिलों और राज्यों के श्रध्दालुओं को रास्ते में रोक दिया गया। कई मेला ट्रेनें रद्द कर दी गईं। काफी बड़ी तादात में लोग बिना स्नान किए ही वापिस अपने घर लौट गए।

मेलाधिकारी और एसएसपी मेला ने की बड़ी चूक

mahakumbh stampede in prayagraj: महाकुंभ में भगदड की घटना ने मेला प्रशासन की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए है। अब कहा यह जा रहा है कि जब मौनी अमावस्या की भीड देखकर भी मेला प्रशासन घटना से पहले कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठा पाया। जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को मौके की स्थिति का अंदाजा पहले ही हो गया था, इसके बावजूद भी मेलाधिकारी विजय किरण आनंद और डीआईजी वैभव कृष्ण, एसएसपी मेला कुछ नहीं कर सके।

संगम नोज पर माइक लेकर चिल्लाते रहे कमिश्नर

मौनी अमावस्या के पूर्व महाकुंभ में हुई भगदड़ से दो घंटे पहले प्रयागराज के कमिश्नर विजय विश्वास पंत संगम गए थे। वहां श्रध्दालुओं की भीड देख उनको अप्रिय घटना का अंदाजा हो गया था। जिसके बाद वो लगातार काफी देर तक माइक लेकर श्रध्दालुओं को वहां से हटने की अपील करते रह गए। उन्होंने भगदड़ का अनुमान भी लगाया, लेकिन इसके बाद भी न मेलाधिकारी चेते और न ही एसएसपी मेला राजेश द्विवेदी ने कोई कदम उठाया। जिससे उस घटना को होने से पहले रोका जा सकता था।

मेलाधिकारी की बताई जा रही यह बड़ी चूक

मौनी अमावस्या के पहले मेला के लिए बने सारे पांटून पुल बंद कर दिए गए थे। जानकारों का कहना है कि यदि पुल खोल दिए गए होते तो संगम पर जुटी भीड पुल से दूसरे पार जाकर निकल जाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और आने जाने का मार्ग एक ही रहा और लोगों को निकलने का रास्ता नहीं मिला जिससे भगदड मची।

फेल रहे मेले के जिम्मेदार पुलिस अधिकारी

महाकुंभ भगदड के बाद लोगों में मेलाधिकारी विजय किरण आनंद, महाकुंभ मेला के एसएसपी राजेश द्विवेदी और डीईजी वैभव कृष्ण की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। लोगो का कहना है कि जब कमिश्नर विजय विश्वास पंत संगम के किनारे माइक लेकर चिल्ला रहे थे तो उस समय मेलाधिकारी, मेला एसएसपी और डीआईजी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। आखिर क्यों उनके द्वारा कमिश्नर के इस अंदाजे को दरकिनार किया गया।

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