प्रयागराज

प्रयागराज में जिंदा जली मां…4 बच्चों को बचाया, क्राकरी कारोबारी के मकान में लगी थी आग

Archana Kesarwani Prayagraj fire : प्रयागराज के नैनी बाजार में 'संजीवनी क्रॉकरी' के मकान में लगी भीषण आग। मां अर्चना केसरवानी ने अपनी जान पर खेलकर 3 बच्चों और भतीजे को सुरक्षित बचाया, लेकिन खुद आग की भेंट चढ़ गईं।

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4 बच्चों को आग से बचाते-बचाते मां ने गंवाई अपनी जान, PC- Patrika

प्रयागराज : मां का प्यार आग को भी मात दे जाता है। प्रयागराज के नैनी बाजार में 12 मई की रात यह बात एक बार फिर साबित हो गई। भीषण आग और घने धुएं के बीच एक मां ने अपने तीन बच्चों और एक भतीजे को बचाने के लिए आखिरी सांस तक जंग लड़ी। आखिरकार बच्चों को सुरक्षित देखकर वह खुद आग की भेंट चढ़ गई।

घटना नैनी बाजार की चैंपियन गली की है। यहां ‘संजीवनी क्रॉकरी’ का कारोबार करने वाले संजीव केसरवानी का परिवार रहता था। घर के पहले तल्ले पर क्रॉकरी सामान का गोदाम था। 12 मई की रात करीब 9 बजे शॉर्ट सर्किट से अचानक आग भड़क उठी। कुछ पलों में पूरी बिल्डिंग धुएं और लपटों में घिर गई।

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ऊपरी मंजिल पर फंस गए थे बच्चे और महिलाएं

घर की महिलाएं और बच्चे ऊपरी मंजिल पर फंस गए थे। नीचे से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था। सब छत पर भागे। संजीव की भाभी सरिता किसी तरह कूदकर बच गईं, लेकिन उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। संजीव की पत्नी अर्चना अपने तीन बच्चों (13 वर्षीय बेटी, 10 वर्षीय बेटी और 1 वर्षीय बेटा) तथा भतीजे लव के साथ छत पर फंस गईं।

धुआं इतना ज्यादा था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। आग की लपटें तेजी से छत की ओर बढ़ रही थीं। लेकिन, अर्चना हार मानने वाली नहीं थीं।

एक साल के मासूम को चादर में लपेट कर उछाला

  • सबसे पहले उन्होंने एक साल के मासूम बेटे को चादर में लपेटा और गली के उस पार खड़े पड़ोसियों की ओर उछाल दिया। पड़ोसियों ने किसी तरह बच्चे को पकड़ लिया।
  • फिर उन्होंने एक सीढ़ी का सहारा लिया और अपनी 13 साल तथा 10 साल की बेटियों को पड़ोसी की छत पर सुरक्षित भेज दिया।
  • आखिर में भतीजे लव को भी सीढ़ी के जरिए दूसरी छत पर पहुंचाया।

करीब 30 मिनट तक यह जद्दोजहद चली। चारों बच्चों को सुरक्षित देखने के बाद अर्चना खुद धुएं और आग की चपेट में आ गईं। देखते-ही-देखते उनकी साड़ी में आग लग गई और वह बुरी तरह झुलस गईं। फायर ब्रिगेड की टीम जब पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

एक बेटी ICU में भर्ती

अर्चना को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी 13 वर्षीय बेटी भी आग में झुलस गई और उसका इलाज आईसीयू में चल रहा है।

फायर ब्रिगेड की 12 गाड़ियों ने तड़के 4 बजे तक मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गली संकरी होने के कारण रेस्क्यू और आग बुझाने में काफी दिक्कत हुई। अर्चना के इस अदम्य साहस ने पूरे प्रयागराज को भावुक कर दिया है। लोग कह रहे हैं। 'मां की ममता ने आग को भी हरा दिया, बस वह खुद नहीं बच पाई।'

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Updated on:
16 May 2026 04:04 pm
Published on:
16 May 2026 04:03 pm
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