Prayagraj News : प्रयागराज में लाइनमैन की मौत के बाद सस्पेंड हुए जेई अभय कुमार यादव जार्जटाउन में बिजली के टावर पर चढ़ गए। बिना पक्ष सुने कार्रवाई का आरोप लगाते हुए उन्होंने बहाली की मांग की है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात।
प्रयागराज: निलंबन की कार्रवाई से आक्रोशित एक जूनियर इंजीनियर (जेई) ने गुरुवार को जार्जटाउन क्षेत्र में 30 फीट ऊंचे बिजली टॉवर पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया। घटना प्रयागराज के जार्जटाउन में हुई, जहां झूंसी में एक दिन पहले लाइनमैन की मौत के मामले में निलंबित जेई अभय कुमार यादव टावर पर चढ़ गए। खबर लिखे जाने तक पुलिस और बिजली विभाग के अधिकारी उन्हें नीचे उतारने के प्रयास में जुटे हुए थे। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
जेई अभय कुमार यादव झूंसी क्षेत्र में तैनात थे। परिवार वालों का आरोप है कि वे रात 2:30 बजे तक ड्यूटी पर रहे और सप्लाई चालू कराने के बाद घर लौट आए। इसके बाद किसी प्राइवेट व्यक्ति ने लाइनमैन को बुलाकर रिपेयरिंग का काम करवाया। इसी दौरान अचानक सप्लाई चालू हो गई, जिससे लाइनमैन को करंट लग गया और उनकी मौत हो गई।
परिवार का कहना है कि बिना जेई का पक्ष सुने और बिना किसी जांच के उन्हें निलंबित कर दिया गया। अभय कुमार यादव ने मांग की है कि जब तक उन्हें बहाल नहीं किया जाता, वे टावर से नीचे नहीं उतरेंगे।
अभय कुमार यादव मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं। वे करीब 10 साल से प्रयागराज में तैनात हैं और मात्र 4 महीने पहले झूंसी के छिबैया फीडर पर नियुक्त किए गए थे।
उत्तर प्रदेश विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के उपाध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
बिना किसी निष्पक्ष जांच के बिजली विभाग के अधिकारियों (अवर अभियंता, एसडीओ और अधिशासी अभियंता) के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जो पूरी तरह गलत है। भीषण गर्मी में रात-रात भर ड्यूटी करने के बावजूद अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो सारा दोष जेई और अधिकारियों पर मढ़ दिया जाता है।
शर्मा ने मांग की कि नियमानुसार काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न तुरंत बंद किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि उनके साथी अभय कुमार यादव के साथ हुए अन्याय के खिलाफ यह विरोध है। अगर उन्हें कोई नुकसान होता है तो इसके जिम्मेदार उच्च अधिकारी होंगे।
यह घटना बिजली विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच बढ़ते तनाव और बिना जांच के निलंबन जैसी कार्रवाइयों को लेकर उठ रहे सवालों को उजागर करती है।