प्रयागराज

यहां रावण के जन्मोत्सव से शुरू होती है राम लीला ,दशहरे में नही होता रावण दहन

रावण से मानते है अपने पूर्वजों का रिश्ता
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Ram Leela begins with Ravana birthday celebration in Prayagraj
यहां रावण के जन्मोत्सव से शुरू होती है राम लीला ,दशहरे में नही होता रावण दहन

प्रयागराज। धर्म नगरी प्रयागराज में रामलीला का मंचन वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार शहर के अलग-अलग हिस्सों में किया जाता है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि प्रयागराज में ही होने वाली एक ऐसी रामलीला जो राम जन्म से नहीं बल्कि रावण के जन्मोत्सव के साथ शुरू होती है। बता दें कि दशहरे के पहले दिन शहर के कटोरे में भव्य रावण बारात निकलती है जो सैकड़ों वर्षों की परंपरा के मुताबिक होती है। यहां सात दिनों तक रामलीला का मंचन होता है। लेकिन इस रामलीला में रावण का वध नहीं किया जाता है ,न ही रावण का दहन होता है।

शहर के कटरा में होने वाली रामलीला में रावण का वध नहीं किया जाता बल्कि यहां रावण की पूजा होती है। यहां रामलीला की शुरुआत राम जन्म के बजाय रावण के जन्म से होती है। कटरा रामलीला कमेटी के लोग रावण को अपना सम्बंधी मानते हैं। दरअसल इस धर्म नगरी के अधिष्ठाता गुरु महर्षि भरद्वाज से रावण का नाता जोड़ते हैं। इस नाते कटरा रामलीला कमेटी रावण को प्रयागराज नाती मानती है।कटरा रामलीला कमेटी के महामंत्री गोपाल बाबू जायसवाल के अनुसार रावण ऋषि विश्रवा की संतान है। ऋषि विश्रवा का रिश्ता महर्षि भरद्वाज के पारिवारिक संबंधों से था। महर्षी भरद्वाज का आश्रम प्रयागराज में था ।वह यही रहा करते थे जिसके कारण यहां रावण से उनका रिश्ता जोड़ा जाता है।

कटरा रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सुधीर गुप्ता के अनुसार परंपरा के निर्वहन के साथ कटरा में रामलीला होती है। भगवान राम के जीवन में संपूर्ण लीलाएं रामलीला में दिखाई जाती है सब कुछ सामान्य रामलीला की तरह ही होता है लेकिन रावण का वध नहीं किया जाता और ना ही यहां रावण का दहन होता है। रावण का वध न करने की परंपरा दशको पुरानी है। यहाँ कभी भी रावण वध नही हुआ। यहाँ की रावण बारात में देश भर में मसहूर है।

Published on:
06 Oct 2019 04:25 pm