प्रयागराज

Mahant Narendra Giri Death : साल भर बाद महंत नरेंद्र गिरि की समाधि पर बनेगा भगवान शिव का मंदिर

Mahant Narendra Giri Death : भू-समाधि की परम्परा में संतों ने नम आंखों से महन्त नरेंद्र गिरि को अंतिम विदाई दी गई
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Updated: 22 Sep 2021, 5:50 PM IST
 shiv temple to be built above Mahant Narendra Giri Samadhi
Mahant Narendra Giri Death : साल भर बाद महंत नरेंद्र गिरि की समाधि पर बनेगा भगवान शिव का मंदिर

प्रयागराज. Mahant Narendra Giri Death- अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि बुधवार तीन बजे भू-समाधि में ब्रम्हलीन हो गये। भू समाधि के चारों ओर संतों ने खड़े होकर 16 मंत्रों का उच्चारण किया। इसके बाद उन्हें बैठने के आसन मुद्रा में समाधि दी गई। इस दौरान निराजनीं अखाड़े के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महन्त शामिल रहे। एक वर्ष बाद उनके समाधि स्थल पर भगवान शिव का मंदिर बनाया जाएगा।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महासचिव हरि गिरि महाराज ने बताया कि महन्त नरेंद्र गिरि की समाधि का एक वर्ष पूर्ण हो जाने के बाद पक्की समाधि बनाई जाएगी। इस समाधि पर भगवान शिव की मूर्ति स्थापित की जाएगी। एक साल तक भू में तपस्या करने के बाद महन्त का शरीर भगवान शिव को समर्पित हो जाता है, इसीलिए श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए उसी समाधि के ऊपर शिव मंदिर स्थापित किया जाता है।

ओम नमो नारायण के साथ विदाई
भू-समाधि की परम्परा में संतों ने नम आंखों से महन्त नरेंद्र गिरि को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान हर किसी ने 'ओम नमो नारायण' का जयकारा लगाकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। महन्त नरेंद्र गिरि अमर रहे का भी जयकारा श्रद्धालुओं ने भी लगाया।

13 दिनों तक शोक में रहेंगे 13 अखाड़ों के संत
राष्ट्रीय महासचिव ने बतया कि भू समाधि के बाद तीन दिन बाद अखाड़े में चूल्हा जलेगा और कच्चा भंडारे का आयोजन होगा। इसके बाद भव्य रूप से सोर्शी भंडारा का आयोजन होगा। अखाड़ा परिसद ने यह आह्वान किया है कि देश के 13 अखाड़ों के संत और महात्मा 13 दिनों तक शोक में रहेंगे।

16 दिनों तक गुप्त जांच करेगा अखाड़ा परिषद
अखिल भारतीय अखाड़ा परिसद के राष्ट्रीय महासचिव ने बताया कि महन्त नरेंद्र गिरि की मौत के विषय में अखाड़ा परिषद 16 दिनों तक गुप्त जांच करेगा। इस जांच में जो कोई भी दोषी मिलेगा, उस पर कार्रवाई करते हुए अखाड़ा परिषद के अधिकारी निर्णय लेंगे। यह जांच अखाड़ा परिसद के टीम द्वारा की जाएगी। पुलिस प्रशासन के जांच के अलावा पूरे प्रकरण में अखाड़ा परिषद गहराई से जांच करेगी।

भू-समाधि की परंपरा
अखिल भारतीय अखाड़ा परिसद के महंत राष्ट्रीय महासचिव हरि गिरी ने बताया कि भू-समाधि की परंपरा को निभाते हुए सबसे पहले उनको गंगा में स्नान कराया गया। भू-समाधि देते समय दही, दूध, अक्षत, शक्कर और अनेक प्रकार से शुद्धिकरण का स्नान हुआ। आखिर में शहद, जल, श्रीखण्ड और अखण्ड भस्मी डालकर समाधि की रस्म पूरी की गई। भस्मी चढ़ने के बाद वह शरीर महादेव को समर्पित हो जाता है। इसके बाद आखिरी में नमक, शक्कर और मिट्टी से श्रद्धांजलि दी गई।

नींबू के पेड़ नीचे समाधि का क्या है महत्व
मौनी महाराज ने बताया कि नींबू के पेड़ नीचे समाधि बनाने का मुख्य कारण यह होता है कि नींबू शत्रुओं के विनाश का कारण बनता है। महन्त नरेंद्र गिरि के शत्रुओं का विनाश हो इसीलिए अपनी समाधि बनाने की इच्छा जताई थी। शास्त्रों में भी तंत्र विद्या में नींबू का जिक्र विनाश के लिए किया गया है। उन्होंने बताया कि भू-समाधि उन सन्यासियों की बनती है जो सन्यास लेने के बाद वह अपना पिंडदान कर देते हैं।

Updated on:
22 Sep 2021, 5:50 PM IST
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