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सांसद अफजाल अंसारी को हाईकोर्ट से 15 दिन की अंतरिम राहत, गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई पर रोक

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। वर्ष 2024 में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा में ये आरोप लगाए गए थे।

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फाइल फोटो पत्रिका

फाइल फोटो पत्रिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी को बड़ी राहत देते हुए 15 दिनों तक किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह राहत उस मामले में दी गई है। जिसमें उन पर गांजा को वैध करने की बात कहने का आरोप है। कोर्ट ने उन्हें आगे की राहत के लिए ट्रायल कोर्ट जाने को कहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपा सांसद अफजाल अंसारी को अस्थायी राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की दमनात्मक कार्रवाई पर 15 दिनों के लिए रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की एकल पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। जिसमें अंसारी ने अपने खिलाफ दाखिल आरोप पत्र और ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन को चुनौती दी थी। पूरा मामला गाजीपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़ा है। साल 2024 में दर्ज एक एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि अफजाल अंसारी ने एक टीवी डिबेट के दौरान गांजा को धार्मिक संदर्भ में जोड़ते हुए उसे वैध घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि साधु-संत इसे प्रसाद के रूप में लेते हैं। और महाकुंभ जैसे आयोजनों में इसका उपयोग आम है। ऐसे में इसे गैरकानूनी क्यों माना जाए।

गांजा वाले बयान पर साधु संतों ने जताई थी आपत्ति

इस बयान के बाद कई साधु-संतों ने आपत्ति जताई थी और विरोध भी दर्ज कराया था। विवाद बढ़ने पर अंसारी ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग ली थी। लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच पूरी कर आरोप पत्र अदालत में पेश कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र को स्वीकार करते हुए उन्हें पेश होने का आदेश दिया था।

राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अंसारी के वकील ने कोर्ट से अपील की कि उन्हें ट्रायल कोर्ट में अग्रिम जमानत या अन्य राहत के लिए आवेदन करने का समय दिया जाए। राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई।
इसके बाद हाईकोर्ट ने 15 दिनों की अंतरिम राहत देते हुए कहा कि इस दौरान उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि यदि अंसारी ट्रायल कोर्ट में कोई अर्जी दाखिल करते हैं। तो उस पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार जल्द फैसला किया जाए। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में ही तय होगी।