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अचानक झगड़े और आवेश में हुई घटना, हत्या नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

हत्या के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए आरोपियों की सजा कम कर दी है।

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Allahabad High Court

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Image-IANS)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले की सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि अचानक झगड़े और आवेश में हुई घटना को हत्या नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपियों की हत्या की सजा को घटाकर गैर इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया है।

हत्या की सजा को घटाकर गैर इरादतन हत्या में परिवर्तित

इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। एक मालले की सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि अचानक झगड़े और आवेश में हुई घटना को हत्या नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह करते हुए आरोपियों आरोपियों की हत्या की सजा को घटाकर गैर इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया है।

हाई कोर्ट ने यह आदेश महेश सिंह व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट में सुनवाई को दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक विवाद के दौरान हुई। इसलिए अधिक से अधिक यह मामला गैर इरादतन हत्या का बनता है।

पैसों के लेन-देन में हुई थी हत्या

आरोपी महेश सिंह व अन्य के खिलाफ शाहजहांपुर के रोजा थाने में हत्या के आरोप में FIR दर्ज हुई थी। दरअसल, 8 जुलाई 2016 को एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन के अनुसार, पंचायत चुनाव के दौरान एक शख्स की आरोपियों के परिवार से जान-पहचान हुई थी। उस दौरान मृतक ने आरोपियों को 1.5 लाख रुपए उधार दिए थे। पैसे वापस मांगने पर आरोपियों ने उसे अपने घर बुलाया और गोली मारकर एवं धारदार हथियार से हत्या कर दी।

ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा

ट्रायल कोर्ट ने हत्या के सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन की कहानी संदेह से परे साबित नहीं हुई है। वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से मृतक को बुलाकर सामूहिक रूप से उसकी हत्या की। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान और मेडिकल साक्ष्य अभियोजन की कहानी की पुष्टि करते हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला सही है और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

दलील सुनने के बाद कोर्ट ने कहा- साक्ष्यों के आधार पर साबित होता है कि घटना अचानक झगड़े और आवेश में हुई। इसमें पूर्वनियोजन का अभाव है। यह आपराधिक मानव वध का मामला है, जो हत्या की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने आरोपियों को पहले से जेल में काटी गई सजा के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि, आरोपियों पर ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए जुर्माने में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

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