प्रयागराज

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आशुतोष महाराज, हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

Swami Avimukteshwaranand Supreme Court : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ आशुतोष महाराज ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। झूंसी थाने में दर्ज POCSO और BNS मामले में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए जमानत रद्द करने की मांग की गई है। जानें क्या है पूरा कानूनी विवाद।
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Updated: 26 Mar 2026, 9:18 PM IST
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आशुतोष महाराज, PC- IANS

प्रयागराज : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को यौन उत्पीड़न के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। लेकिन, आशुतोष महाराज ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आशुतोष महाराज ने इस मामले को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

मामले की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपियों को दी गई जमानत रद्द करने की मांग करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई है।

एसएलपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के प्रावधानों के तहत दर्ज एक मामले में हिंदू संत और उनके सह-आरोपियों को अग्रिम जमानत दी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 मार्च के अपने आदेश में कहा था कि तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत देने का मामला बनता है।

50 हजार के निजी मुचलके पर किया गया रिहा

न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपियों को 50,000 रुपए के निजी मुचलके और दो जमानती पेश करने पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए, जिसमें जांच में सहयोग और गवाहों को प्रभावित न करना जैसी शर्तें शामिल हैं।

राहत आदेश में अभियोजन पक्ष के मामले में कई विसंगतियां दर्ज की गई थीं, जिनमें शिकायत दर्ज करने में देरी और घटनास्थल और समय के संबंध में कथित पीड़ितों के बयानों में विरोधाभास शामिल हैं।

न्यायालय ने कहा कि पीड़ितों का अभिभावक होने का दावा करने वाले प्रथम सूचनादाता को कथित अपराध की सूचना 18 जनवरी, 2026 को मिली थी, लेकिन उसने पूजा/यज्ञ में व्यस्त होने का हवाला देते हुए छह दिन की देरी से पुलिस को सूचना दी।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने लगाए थे आरोप

महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यायमूर्ति सिन्हा ने जांच और मुकदमे की सुनवाई के दौरान आवेदकों, पीड़ितों और प्रथम शिकायतकर्ता को मीडिया साक्षात्कार देने से भी रोक दिया था। यह मामला आशुतोष ब्रह्मचारी की तरफ से दायर शिकायत के आधार पर पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़ा है, जिसके बाद इस वर्ष फरवरी में एक विशेष पॉक्सो अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

इससे पहले, 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी और उन्हें चल रही जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

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26 Mar 2026, 9:18 PM IST
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