पुणे

अजीत पवार ने कभी नहीं सोचा था…लेकिन वहीं डॉक्टरों ने रोते हुए किया पोस्टमार्टम, बारामती अस्पताल पर खुद नजर रखते थे ‘दादा’

Ajit Pawar: बुधवार को हुए विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत हो गई। बारामती के जिस अस्पताल को उन्होंने संवारने में अहम भूमिका निभाई थी, वहीं उनका पोस्टमार्टम हुआ। डॉक्टरों के लिए यह पल बेहद भावुक था, लेकिन जिम्मेदारी निभानी पड़ी।
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Jan 29, 2026
Doctors conducted the post-mortem of Ajit Pawar at Baramati Hospital

Ajit Pawar: बुधवार को हुए विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत हो गई। आज उनका अंतिम संस्कार किया गया। बारामती के जिस अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम हुआ, उसे बनवाने और विकसित करने में अजीत पवार की अहम भूमिका रही थी। शायद उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिस अस्पताल को उन्होंने संवारने का काम किया, उसी में एक दिन उनका पोस्टमार्टम होगा। डॉ. खोमणे ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान सभी डॉक्टर भावुक हो गए थे और उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन जिम्मेदारी निभाना जरूरी था।

आपको बता दें कि इस सरकारी मेडिकल कॉलेज की 6 साल पहले स्थापना हुई थी, डिप्टी सीएम जब अपने क्षेत्र बारामती में आते थे वह इस अस्पताल का बारीकी से निरिक्षण करते थे। इस संस्थान में छोटी से छोटी व्यवस्था तक पर वह खुद नजर रखते थे। चाहे ऑडिटोरियम की साज-सज्जा हो या विभागों का कामकाज। उनका सपना था कि यह कॉलेज एक बेहतरीन मेडिकल संस्थान बने। लेकिन किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन इसी कॉलेज में उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा और पहचान के लिए डीएनए नमूने लेने पड़ेंगे।

ऐसे हुई सभी शवों की पहचान

बारामती तालुका के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज खोमणे ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 8:47 बजे एसडीओ कार्यालय से अतिरिक्त एंबुलेंस की जरूरत को लेकर उन्हें कॉल आया था। वीआईपी प्रोटोकॉल के चलते एंबुलेंस पहले से ही एयरस्ट्रिप पर तैनात थीं। सभी को उम्मीद थी कि कोई बड़ा हादसा न हुआ हो, लेकिन परिस्थितियां तेजी से बिगड़ती चली गईं। उन्होंने बताया कि 8:49 बजे तक मेडिकल कॉलेज के बाहर भीड़ आक्रोशित हो गई और पूरा अस्पताल स्टाफ सदमे में डूबा हुआ था। इसी दौरान पुणे से स्वास्थ्य विभाग की टीमें बारामती पहुंचीं, जहां सबसे बड़ी चुनौती मृतकों की पहचान करना थी। हादसे में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल थे। शव बुरी तरह झुलस चुके थे, लेकिन पुलिस ने अजीत पवार की पहचान उनकी कलाई घड़ी से की। उनके निजी सुरक्षा अधिकारी विदिप जाधव की पहचान कमर पर लगे नेमप्लेट से हुई, जबकि तीसरे पुरुष की पहचान पायलट की वर्दी से हुई।

Ajit Pawar को नहीं भूल पाएंगे बारामती के डाक्टर्स

कई डॉक्टरों का कहना है कि अजीत पवार मेडिकल क्षेत्र से जुड़े मामलों को लेकर हमेशा गंभीर और सक्रिय रहते थे। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ गजेटेड मेडिकल ऑफिसर्स के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. खोमणे ने बताया कि सातवें वेतन आयोग के तहत नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस लागू कराने में अजीत पवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे बड़ी संख्या में डॉक्टरों को फायदा मिला। आज वही मेडिकल कॉलेज, जिसे उन्होंने सालों तक संवारने में योगदान दिया, उनकी अंतिम चिकित्सकीय प्रक्रिया का गवाह बना। यह दृश्य बारामती और वहां के चिकित्सकों के लिए एक ऐसी टीस छोड़ गया है, जिसे वे शायद कभी भुला नहीं पाएंगे।

Updated on:
29 Jan 2026 08:17 pm
Published on:
29 Jan 2026 08:17 pm