रायबरेली

Antibiotics misuse: एंटीबायोटिक के बेलगाम इस्तेमाल से इंसानों और पशुओं के शरीर में जहर घोल रहा ‘सुपरबग’

Antibiotics misuse: पोल्ट्री और डेयरी फार्मिंग में एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग चिंता का विषय बन गया है। झोलाछाप डॉक्टरों और किसानों द्वारा दी जा रही इन दवाओं का असर दूध, मांस और सब्जियों के रास्ते सीधे मानव शरीर में पहुंच रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर- एआइ

Antibiotics misuse: उत्तर प्रदेश के रायबरेली समेत कई जिलों में पशुपालन और खेती में एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है। पशुपालक अक्सर बिना डॉक्टरी सलाह के ही जानवरों को एंटीबायोटिक दे रहे हैं। कई बार पशुपालक झोलाछाप डॉक्टरों के कहने पर या स्वयं ही अनुभव के आधार पर दवाएं खिला देते हैं। नतीजा यह होता है कि इन जानवरों से मिलने वाले मांस, अंडे और दूध में दवा के अवशेष (Chemical Residues) रह जाते हैं जो इंसानों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।

क्या होते हैं सुपरबग?

सुपरबग वे खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं जो सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं से नहीं मरते। बिना जरूरत के या अधूरी मात्रा में एंटीबायोटिक इस्तेमाल करने से ये बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं। नतीजा यह होता है कि छोटी-मोटी बीमारियां भी इलाज से परे हो जाती हैं और जानलेवा बन सकती हैं। यह समस्या दूध, मांस और अंडों के जरिए इंसानों तक पहुंच रही है।

बीमार न होने पर भी मुर्गियों को खिला रहे दवा

पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों को बीमारियों से बचाने के नाम पर उनके दाने या पानी में एंटीबायोटिक मिला दी जाती है, जबकि कई बार उन्हें संक्रमण होता ही नहीं है। इसी तरह गाय-भैंस के बीमार होने पर उन्हें एंटीबायोटिक दी जाती है। नियम यह है कि दवा के असर के दौरान उस पशु का दूध नहीं पीना चाहिए लेकिन जानबूझकर या लापरवाही में वह दूध बाजारों और घरों तक पहुंच रहा है जो शरीर में संक्रमण और एंटीबायोटिक प्रतिरोध का खतरा बढ़ा रहा है।

फसलों और सब्जियों में भी प्रयोग

यह दुरुपयोग सिर्फ पशुओं तक ही सीमित नहीं है खेती में भी एंटीबायोटिक्स का जमकर प्रयोग हो रहा है। नींबू, टमाटर, लौकी और कद्दू जैसी सब्जियों में बैक्टीरियल रोगों को रोकने के लिए 'स्ट्रेप्टोसाइक्लिन' जैसी दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक फलों और सब्जियों को समय से पहले बड़ा करने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।

डॉक्टरों की सलाह

पशु चिकित्सकों का कहना है कि एंटीबायोटिक्स बैक्टीरियल संक्रमण पर ही प्रभावी होता है। वायरल बीमारियां जैसे सर्दी-जुकाम, फ्लू व ज्यादातर बुखार में इनकी कोई भूमिका नहीं होती है। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से शरीर के बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं जिसे 'एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस' (AMR) कहते हैं। इसके बाद साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन जाते हैं क्योंकि दवाएं असर करना बंद कर देती हैं। इसी प्रकार पशुओं को भी कोई दवा देने से पहले पशु चिकित्सा अधिकारी से सलाह लेना अनिवार्य है।

Updated on:
08 Feb 2026 04:51 pm
Published on:
08 Feb 2026 04:44 pm