रायगढ़

CG Train: अब नहीं होंगे ट्रेन एक्सीडेंट, अब रेलवे करेगी इस खास तकनीक का होगा उपयोग

CG Train: साथ ही समपार फाटकों पर आटो सीटी बजना और विषम स्थिति ट्रेनों के नियंत्रित के साथ एसओएस प्रणाली को भी सक्रिय करेगा, जिससे आसपास चल रहे ट्रेनों का संचालन रूक जाएगा।

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Jul 02, 2024

CG Train: लगातार हो रहे ट्रेन हादसे को रोकने के लिए अब रेलवे विभाग द्वारा ‘कवच’ नामक स्वचलित ट्रेन सुरक्षा (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन) प्रणाली विकसित कर रही है। जो पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक है और ट्रेनों के संचालन की हर पल निगरानी रखेगी। इसमें यदि दो ट्रेन एक ही ट्रेक पर आती है तो इस कवच प्रणाली के जरिए सिग्नल एवं स्पीड से संबंधित दुर्घटनाओं को होने से पहले ही रोक देगी।

दिनों-दिन बढ़ रही ट्रेनों की संख्या के साथ रेलवे विभाग द्वारा रेलवे ट्रेक सहित अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इससे हादसे भी हो रहे हैं। इससे रेलवे को काफी नुकसान तो होता है साथ ही कई बार सफर करने वाले यात्री भी इस हादसे के चलते जान गवां देते हैं।

इसको देखते हुए रेलवे द्वारा सुरक्षा के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में झारसुगुड़ा-बिलासपुर व रायपुर-नागपुर सेक्सन में कवच नामक (ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन) लगाने की तैयारी चल रही है। यह सुविधा लग जाने के बाद अगर एक ही ट्रेक पर दो ट्रेन आती है यह कवच दोनों ट्रेनों की गति अपने आप कम कर देगी साथ ही नजदीक आते ही दोनों ट्रेन खुद से रूक जाएगी। इससे हादसा टल जाएगी।

ट्रेनों का संचालन स्टेशन प्रणाली व ट्रेन ड्रायवरों द्वारा किया जाता है। जिससे ट्रेनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्टेशन मास्टर एवं ट्रेन ड्राइवरों पर रहता है। ऐसे में स्टेशन मास्टर से कोई गलती न हो इसके लिए सिग्नल एवं दूरसंचार सिस्टम की इंटरलॉकिंग द्वारा सुनिश्चित किया जाता है, लेकिन कई बार मानवीय भूल के चलते अब तक ड्राइवरों के पास कोई ऐसी विश्वसनीय मदद नहीं थी।

जिससे हादसा हो जाता था। ऐसे में "कवच" (ट्रेन कोलाईजन एवोइडेंस सिस्टम) प्रणाली ट्रेन ड्राइवरों की मदद के लिए लगाने की तैयारी चल रही है। ताकि अगर कभी ट्रेन ड्राइवर स्पीड कंट्रोल करना या ब्रेक लगाना भूल जाता है तो "कवच" प्रणाली "ब्रेक इंटरफेस यूनिट" खुद ट्रेन को कंट्रोल कर लेगी, जिससे हादसा होने से बच जाएगी।

CG Train: कोहरे व बरसात में भी बेहतर कार्य

कवच प्रणाली ड्राइवर के केबिन व लाइन-साइड सिग्नल के आस्पेक्ट को दोहराती है, जिससे घने कोहरे व बरसात मौसम के दौरान भी ट्रेन संचालन की सुरक्षा इस कवच के जरिए होगी। कई बार ऐसी स्थिति बनती है कि कोहरे के कारण सिग्नल दिखाई नहीं देता है। ऐसे में इसके लग जाने से लोको पायलट ब्रेक लगाना भूल जाता है तो कवच प्रणाली खुद ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति को नियंत्रित कर देगी। इससे सीधे टकराव से ट्रेन बच जाएगी। साथ ही समपार फाटकों पर आटो सीटी बजना और विषम स्थिति ट्रेनों के नियंत्रित के साथ एसओएस प्रणाली को भी सक्रिय करेगा, जिससे आसपास चल रहे ट्रेनों का संचालन रूक जाएगा।

बिलासपुर रेलवे पीआरओ अंबिकेश साहू का कहना है कि दपूमरे के नागपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन को कवच परियोजना के लिए चयन किया गया है। इसके अनुमादन के लिए प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। वहां स्वीकृति मिलते ही कवच सुरक्षा प्रणाली को लगाने का काम शुरू किया जाएगा।

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