रेलवे ने ऑपरेटर को छह माह बाद स्मरण पत्र भेजते हुए उक्त तार को हटाने का आदेश दिया है, नहीं हटाने की स्थिति में उक्त तार को काट कर जब्त करने की कवायद की जाएगी।
रायगढ़. रेलवे कॉलोनी व सर्कुलेटिंग एरिया में पिछले कई वर्षों से अवैध रुप से केबल ऑपरेटर द्वारा तारों की सप्लाई की गई है। खास बात तो यह है कि व्यवसायिक फंडे में ऑपरेटर द्वारा रेलवे के सक्षम अधिकारी से इस संबंध कोई अनुमति नहीं ली है। जिसका खुलासा होने के बाद रेलवे ने ऑपरेटर को अपने अव्यवस्थित तारों को हटाने को लेकर पत्र जारी किया था, पर ऑपरेटर द्वारा रेलवे के इस पत्र को नजरअंदाज किया गया। इसके बाद रेलवे ने ऑपरेटर को छह माह बाद स्मरण पत्र भेजते हुए उक्त तार को हटाने का आदेश दिया है। वहीं नहीं हटाने की स्थिति में उक्त तार को काट कर जब्त करने की कवायद की जाएगी।
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रेलवे कॉलोनी में रहने वाले करीब ३०० रेलकर्मियों के मनोरंजन पर ग्रहण लग सकता है। मामला कॉलोनी में अवैध रुप से केबल की सप्लाई करने से जुड़ा हुआ है। जिसको लेकर केबल ऑपरेटर द्वारा रेलवे से कोई अनुमति नहीं ली गई है। इस बात का खुलासा जीएम के रायगढ़ दौरे को लेकर हो रही साफ-सफाई के दौरान हुआ। जिसके बाद रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी ने केबल ऑपरेटर सुशील मित्तल के इस संबंध में २० दिसंबर २०१७ को एक पत्र जारी किया था। जिसमें अवैध रुप से फैले केबल के तारों को समेट कर हटाने का आदेश जारी किया गया था, पर केबल ऑपरेटर द्वारा उक्त तारों को हटाना तो दूर अभी तक उसी व्यवस्था में केबल की सप्लाई के साथ ग्राहकों से प्रतिमाह मनोरंजन शुल्क की वसूली की जा रही है।
करीब छह माह बाद इस विषय पर रेलवे की नींद खुली है और उसने ऑपरेटर मित्तल को स्मरण पत्र जारी किया है। जिसमें इस बात का उल्लेख किया गया है कि अवैध रुप से संचालित हो रहे केबल के इस व्यवसाय में रेलवे की अनुमति नहीं ली गई है। इस मामले पर अवगत कराने के बाद आपके द्वारा उक्त तारों को हटाने की पहल नहीं की गई। ऐसी स्थिति में स्मरण पत्र जारी कर याद दिलाने की पहल की गई है।
तीन दिन का दिया था समय, कभी भी कार्रवाई
रेलवे द्वारा १४ जून को इस संबंध में केबल ऑपरेटर सुशील मित्तल को पत्र जारी किया गया था। जिसमें पत्र जारी होने के तीन दिन के अंदर उक्त केबल के तारों को हटाने का आदेश दिया गया था। जिसे ५वें दिन यानी १९ जून की दोपहर १२ बजे तक नहीं हटाया गया था। ऐसी स्थिति में रेलवे द्वारा अब उक्त तारों को काट कर जब्त करने की पहल करने की बात कही जा रही है। जानकारों की माने तो इस कवायद में रेल अधिकारी, आरपीएफ व कोतवाली पुलिस की मदद ले सकती है।